
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : होटल ताज में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘श्रम संवाद 2026’ का समापन चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर विस्तृत मार्गदर्शन और उद्योग जगत की शंकाओं के समाधान के साथ हुआ। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में करीब 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन मनोहर लाल मन्नू कोरी ने कहा कि श्रमिक कल्याण और कारोबार को सुगम बनाना सरकार की प्राथमिकता है। नई श्रम संहिताओं से भर्ती और वेतन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा उद्योगों की समस्याओं का समाधान होगा।
29 कानूनों की जगह चार श्रम संहिताएं
निदेशक, श्रम सुधार डॉ. पी.के. जेना ने बताया कि 29 श्रम कानूनों को समाहित कर बनाई गई चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से लागू हैं। इनके तहत न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों को मजबूती दी गई है। रजिस्टरों की संख्या 84 से घटाकर आठ और रिटर्न 31 से घटाकर एक करने जैसे प्रावधानों से अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी।
तकनीकी सत्रों में वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता की प्रमुख व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। ओवरटाइम पर दोगुना वेतन, निर्धारित समय में वेतन भुगतान, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी और छंटनी के बाद पुनः कौशल विकास के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।

रोजगार और बाल श्रम उन्मूलन पर जोर
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत नए कर्मचारियों और नियोक्ताओं को मिलने वाले प्रोत्साहनों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने उद्योगों से योजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की। बाल श्रम एवं बंधुआ श्रम सत्र में कानूनी प्रावधानों और जागरूकता अभियान पर जोर दिया गया।
प्रश्नोत्तर सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने कार्य अवधि, ग्रेच्युटी, पंजीकरण और ठेकेदारों से जुड़े सवाल उठाए, जिनका अधिकारियों ने समाधान किया। अंत में विशेष सचिव कुणाल सिल्कू ने सभी अधिकारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
