
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर / बीकानेर : उत्तर पश्चिम रेलवे के सुरक्षा तंत्र ने ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मदुरै-बीकानेर अणुव्रत एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 22631) में हुई एक करोड़ रुपये से अधिक की चोरी का पर्दाफाश किया है। आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की संयुक्त टीम ने तकनीकी सुरागों के आधार पर हरियाणा में दबिश देकर अंतरराज्यीय गैंग के चार शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 700 ग्राम सोने के आभूषण, 500 ग्राम चांदी, 5 लाख रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त महिंद्रा बोलेरो गाड़ी बरामद की है।
11 सितंबर की वारदात से शुरू हुई जांच की परतें:
यह मामला 11 सितंबर को नागपुर से नोखा की यात्रा कर रहीं मंगी देवी (55) और उनकी बेटी डिंपल राजपुरोहित के साथ घटित हुआ था। वे बी-1 कोच में सफर कर रही थीं, जब शातिर चोरों ने श्री बालाजी स्टेशन के पास सामान रखने में मदद करने के बहाने उनके सूटकेस का लॉक खोलकर जेवर उड़ा दिए। विक्रम रमेश राजपुरोहित की शिकायत पर 14 सितंबर को जीआरपी बीकानेर में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मल्टी-स्टेट ऑपरेशन और तकनीकी इनपुट से मिली सफलता:
मार्क विहीन रास्तों और मकराना रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में चार संदिग्धों के दिखने तथा बाहर खड़ी एक संदिग्ध काली बोलेरो के फास्टैग व टोल डेटा से पुलिस को अहम सुराग मिले। जीआरपी बीकानेर की एसएचओ नेहा राजपुरोहित और आरपीएफ नागौर के उप निरीक्षक रमेश कुमार के नेतृत्व में विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया था। इस सफल ऑपरेशन में जीआरपी साइबर सेल के सहायक उपनिरीक्षक दीपेंद्रपाल सिंह, कांस्टेबल राजाराम, दिलीप कुमार और अनिल कुमार ने तकनीकी विश्लेषण में अहम भूमिका निभाई। पूछताछ में आरोपियों ने 6-7 सदस्यीय गिरोह का खुलासा किया है, जो लंबी दूरी की एसी ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाता था। पुलिस रिमांड के दौरान शेष संपत्ति और अन्य फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
