
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति, भारतरत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की पावन जयंती पर विश्वविद्यालय में ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ की भव्य परिकल्पना को समर्पित एक विशेष रचनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस ऐतिहासिक अवसर पर महाकौशल प्रांत के प्रांत कार्यवाह उत्तम बनर्जी एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे द्वारा नवनिर्मित व नवसज्जित ‘भारतरत्न नानाजी देशमुख परिसर’ का विधिक लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही नवसृजित नानाजी पीठ एवं नानाजी विचार मंच की शैक्षणिक गतिविधियों का भी मुस्तैद शुभारंभ हुआ।

दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन को धरातल पर उतारा: उत्तम बनर्जी
किसान भवन में ‘नानाजी देशमुख : ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की यात्रा’ विषय पर आयोजित स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता उत्तम बनर्जी ने कहा कि चित्रकूट नानाजी की वास्तविक प्रयोगभूमि है और ग्रामोदय विश्वविद्यालय उसकी मुख्य प्रयोगशाला है। उन्होंने कहा कि नानाजी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन को यथार्थ के धरातल पर उतारा तथा चित्रकूट के 50 किलोमीटर की परिधि में ‘समाज शिल्पी दंपतियों’ के माध्यम से ग्राम विकास का एक विस्मयकारी प्रतिमान स्थापित किया।
शिक्षा ही सभी सामाजिक चुनौतियों के समाधान की सीढ़ी
विशिष्ट अतिथि व राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय (छिंदवाड़ा) के कुलगुरु प्रो. आई.पी. त्रिपाठी तथा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (जबलपुर) के पूर्व कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्रा ने कहा कि नानाजी का दृढ़ विश्वास था कि समाज की सभी चुनौतियों का अंतिम समाधान केवल संस्कारयुक्त शिक्षा में निहित है। 1952 में उनके द्वारा प्रारंभ सरस्वती शिशु मंदिर इसका प्रेरक उदाहरण है। कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय को नानाजी के विचारों के अनुरूप आगे बढ़ाने की विधिक प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के संयोजक व नानाजी पीठ के निदेशक प्रो. भरत मिश्रा ने कहा कि नानाजी ने राजनीति को सेवा और स्वावलंबन की एक नई दिशा दी । इस पावन अवसर पर अतिथियों द्वारा ‘एक पेड़ नानाजी के नाम’ अभियान के तहत परिसर में मुस्तैद वृक्षारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पांडेय ने सभी के प्रति विधिक आभार प्रदर्शन किया तथा संचालन प्रो. ललित कुमार सिंह द्वारा किया गया। समारोह में भारी संख्या में संकायों के डीन, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
