ग्रामोदय विश्वविद्यालय के एआई नवाचार को भारत सरकार की मान्यता, व्यक्तिगत शिक्षा हेतु विकसित डिज़ाइन हुआ पंजीकृत

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है कि विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा विकसित एक अभिनव कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शैक्षणिक उपकरण के डिज़ाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पंजीकृत किया गया है। यह उपलब्धि शिक्षा में तकनीकी नवाचार तथा वैयक्तिकृत शिक्षण को नई दिशा प्रदान करने वाली मानी जा रही है।

इस नवाचार के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. देव रस पाण्डेय एवं उनकी शोध टीम द्वारा विकसित इस तकनीकी डिज़ाइन का नाम “एआई-इनहांस्ड एजुकेशनल डिवाइस फॉर पर्सनलाइज्ड लर्निंग” रखा गया है। यह एआई-संचालित शैक्षणिक उपकरण विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सीखने की क्षमता, गति, रुचि तथा आवश्यकताओं का विश्लेषण कर उनके अनुरूप शिक्षण सामग्री एवं अध्ययन मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इससे प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी क्षमता के अनुसार गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षा प्रदान करना संभव होगा। कुलगुरू प्रो आलोक चौबे ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय नवाचारों का हिमायती है और विश्वविद्यालय इस दिशा में सार्थक और युगानुकुल प्रभावी कदम उठा रहा है।

डॉ. देव रस पाण्डेय ने बताया कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह डिवाइस स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षा, अनुकूली शिक्षण तथा वैयक्तिकृत शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह तकनीक विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का विश्लेषण कर उन्हें बेहतर शैक्षणिक अनुभव प्रदान करने में सहायक होगी।

डॉ. पाण्डेय कंप्यूटर साइंस एवं इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय शोधकर्ता हैं। उन्होंने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विषय में पीएच.डी. उपाधि प्राप्त की है। उनके शोध कार्यों में वर्ष 2015 में विश्वविद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी हेतु क्लाउड कंप्यूटिंग, वर्ष 2017 में क्लाउड कंप्यूटिंग में ऑपरेटिंग सिस्टम आधारित वर्चुअलाइजेशन मॉडल, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित साइबर सुरक्षा, वर्ष 2024 में आईओटी एवं वाहन डेटा संरक्षण : एक नया सुरक्षा प्रतिमान”, डीप लर्निंग मॉडल, ऑटोनॉमस रोबोटिक्स, परिवर्धित कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा हेल्थकेयर डेटा गुणवत्ता सुधार हेतु एआई आधारित तकनीकों पर उल्लेखनीय अनुसंधान शामिल हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार द्वारा पंजीकृत यह डिज़ाइन भविष्य की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगा। यह नवाचार न केवल स्मार्ट क्लासरूम की अवधारणा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी गुणवत्तापूर्ण, तकनीक-सक्षम और व्यक्तिगत शिक्षा पहुंचाने में उपयोगी भूमिका निभाएगा।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में विकसित यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति, नवाचार क्षमता तथा राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। विश्वविद्यालय परिवार ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. देव रस पाण्डेय एवं उनकी शोध टीम को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि यह नवाचार भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रभावी और भविष्य उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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