बीबीएयू में ‘जैव हरित’ उद्यम की शुरुआत, विद्यार्थियों ने 80 किलो वर्मीकम्पोस्ट बेची

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने जैविक अपशिष्ट से उपयोगी खाद तैयार कर उसकी बिक्री के लिए प्री-स्टार्टअप उद्यम ‘जैव हरित’ की शुरुआत की है। नवकल्पना, बीबीएयू के तत्वावधान में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जैविक कचरे के सदुपयोग को प्रोत्साहित करना है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने उद्यम का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नवाचारपूर्ण विचारों को व्यावहारिक रूप देने और शोध आधारित गतिविधियों से उद्यमशीलता कौशल विकसित करने की आवश्यकता है। इस परियोजना का संचालन डॉ. जीवन सिंह और प्रो. शिखा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

‘जैव हरित’ के तहत विश्वविद्यालय परिसर में एकत्रित सूखी पत्तियों और गोबर से वर्मीकम्पोस्ट तैयार की गई। परियोजना के अंतर्गत कुल 2,000 किलोग्राम जैविक खाद का उत्पादन किया गया, जिसमें से 300 किलोग्राम खाद बिक्री के लिए पैक की गई। शुभारंभ के दौरान 80 किलोग्राम वर्मीकम्पोस्ट की बिक्री हुई।

इस उद्यम को सफल बनाने में विद्यार्थियों रोशनी बजाज, पूजा अडवानी, दीपिका मिश्रा, गौरव सिंह रौतेला, अमन, नरेश और हर्षिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्पाद में रुचि दिखाई। प्रो. सुनीता मिश्रा ने 26 किलोग्राम और प्रो. शालिनी अग्रवाल ने 10 किलोग्राम खाद खरीदी। इसके अलावा प्रो. शिखा, प्रो. सुभाष मिश्रा, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, डॉ. मोनिका शर्मा और प्रो. मधुलिका दुबे सहित अन्य सदस्यों ने भी उत्पाद की खरीद की।

इस पहल से विद्यार्थियों को खाद उत्पादन, पैकेजिंग, विपणन और ग्राहक संवाद का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। साथ ही, परिसर में उत्पन्न जैविक कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदलने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। विश्वविद्यालय समुदाय की उत्साहजनक प्रतिक्रिया से ‘जैव हरित’ के भविष्य में विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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