‘ज्ञान का पिटारा’ ने बदली श्रेया की जिंदगी, स्कूल से दूरी बनाने वाली बच्ची अब पढ़ाई में अव्वल

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के एक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली 10 वर्षीय श्रेया की कहानी ग्रामीण शिक्षा और रेमेडियल लर्निंग की नई उम्मीद बनकर सामने आई है। बुनियादी शिक्षा में कमजोर होने के कारण पढ़ाई से दूर हो चुकी श्रेया अब नियमित रूप से स्कूल जा रही हैं और हिंदी, अंग्रेजी व गणित जैसे विषयों में अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप प्रदर्शन कर रही हैं।

श्रेया का दाखिला स्कूल में था, लेकिन अक्षरों, संख्याओं और विषयों की बुनियादी समझ कमजोर होने के कारण वह अन्य बच्चों से पिछड़ गई थीं। पढ़ाई में लगातार कठिनाइयों के चलते उनका मन उचट गया और उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति और जागरूकता की कमी के कारण वह घर के कामकाज तक सीमित होने लगी थीं।

वर्ष 2026 में एजुकेट गर्ल्स संस्था की ‘टीम बालिका’ ने घर-घर संपर्क अभियान के दौरान श्रेया के पिता फूलचंद प्रजापति और माता शालू प्रजापति से मुलाकात की। टीम ने अभिभावकों को बालिका शिक्षा का महत्व समझाया और श्रेया को दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता के सहयोग से विशेष शिक्षण सत्र शुरू करने की योजना बनाई गई।

इसके तहत कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों के लिए ‘ज्ञान का पिटारा’ (जीकेपी) कार्यक्रम के माध्यम से गतिविधि कार्ड, अल्फाबेट कार्ड, नंबर कार्ड और खेल-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई। इस तरीके से बच्चों के मन से पढ़ाई का डर दूर करने और उनकी बुनियादी समझ मजबूत करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम से श्रेया के आत्मविश्वास और सीखने के स्तर में सुधार आया। श्रेया ने कहा कि अब उन्हें जीकेपी के सत्रों में पढ़ना अच्छा लगता है और वह हर दिन स्कूल आती हैं।

श्रेया के माता-पिता ने इस पहल की सराहना की। प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता ने भी एजुकेट गर्ल्स और टीम बालिका के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से बच्चों के सीखने के स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।

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