बीबीएयू में प्रथम युवा संसद-2026 का आयोजन, सतत विकास लक्ष्यों में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर मंथन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बुधवार को सतत विकास लक्ष्य समिति की ओर से प्रथम युवा संसद-2026 का आयोजन किया गया। इसमें “सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका” विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह मुख्य अतिथि रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। युवा संसद में 10 टीमों ने प्रतिभाग किया, जिनमें प्रत्येक टीम में आठ सदस्य शामिल थे।

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध और सामुदायिक सहभागिता समाज के कल्याण तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को ज्ञान की संसद बताते हुए विद्यार्थियों से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने, आत्मचिंतन करने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन पर भी जोर दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. अमरपाल सिंह ने कहा कि युवा संसद विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच है। इससे विद्यार्थियों को संविधान, कानून, संसदीय प्रक्रियाओं और जनहित के मुद्दों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, धर्म और स्वाध्याय के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में तार्किक चिंतन, संवाद कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। वहीं, कार्यक्रम संयोजक एवं सतत विकास लक्ष्य समिति के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।

प्रतियोगिता के विजेताओं को कुलपति ने सम्मानित किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 प्रतिभागियों को अगले स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. पद्म जी. ओमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन में विभिन्न संकायों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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