
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के सी.एम.सी.एल.डी.पी. सभागार स्थित बाल्मीकि सभागार में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन रहे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की।
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. कपिल देव मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो. भरत मिश्रा, कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पांडेय, कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एच.एस. कुशवाहा, सी.एम.सी.एल.डी.पी. के निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह तथा अभियांत्रिकी संकाय के अधिष्ठाता इंजी. अश्विनी दुग्गल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. ललित कुमार सिंह ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि अभय महाजन एवं कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और वृक्षारोपण किया। इसके उपरांत बाल्मीकि सभागार में विद्यादायिनी माँ सरस्वती एवं महर्षि संदीपनी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पांडेय ने मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया, जबकि छात्र-छात्राओं ने मंचासीन गुरुजनों का अंगवस्त्र अर्पित कर सम्मान किया।
मुख्य अतिथि अभय महाजन ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा केवल ज्ञान प्रदान करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने समर्थ गुरु रामदास और छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस तथा गुरु दत्तात्रेय के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य का पहला गुरु उसकी माता, दूसरा पिता और तीसरा समाज होता है। उन्होंने राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के जीवन-दर्शन “मैं अपने लिए नहीं, अपनों के लिए हूँ” को समाज जीवन का सर्वोच्च आदर्श बताते हुए युवाओं से सेवा, समर्पण और राष्ट्रभाव से जीवन जीने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कहा कि भारत के पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों के संवाहक हैं। गुरु-शिष्य संबंध विश्वास, समर्पण और आत्मीयता पर आधारित होता है। गुरु अपने शिष्य की सफलता का श्रेय सदैव उसे देता है और उसकी कमियों को स्वयं सुधारने का प्रयास करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ किसी एक हुनर या कौशल में दक्षता भी आवश्यक है। यही भविष्य में सफलता का सबसे बड़ा आधार बनेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, छोटी-छोटी असफलताओं से निराश न होने, निरंतर संवाद बनाए रखने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
छात्र-शिक्षक संवाद सत्र में आई.टी.ई.पी. की छात्रा यामिनी तुरकर ने छात्र के समग्र विकास पर आधारित काव्य प्रस्तुति दी। छात्र विशाल दांगी ने गुरु-शिष्य परंपरा, मीनाक्षी गर्ग ने समावेशी शिक्षा तथा अंकुश गभने ने गुरु के मार्गदर्शन की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि एवं कुलगुरु ने उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर नगर पंचायत चित्रकूट द्वारा चित्रकूट गौरव से सम्मानित खेल विभाग के छात्र अजय दीप पाल एवं छात्रा गंगा देवी का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पांडेय ने आभार व्यक्त किया। संचालन प्रो ललित कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।