चित्रकूट शरदोत्सव का भव्य समापन, श्रीराम अय्यर के भजनों पर देर रात तक झूमे श्रद्धालु

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान एवं संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव का समापन संगीत, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अद्भुत संगम के साथ हुआ। दीनदयाल परिसर में आयोजित अंतिम संध्या में मुंबई के प्रसिद्ध गायक श्रीराम अय्यर और उनकी टीम ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। गुलाबी ठंड और ओस के बीच देर रात तक बड़ी संख्या में लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

समापन समारोह का शुभारंभ भारत रत्न नानाजी देशमुख की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर नर्मदापुरम के सांसद दर्शन चौधरी, सीधी के सांसद राजेश मिश्रा, विभिन्न आश्रमों के संत-महंत, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

नर्मदापुरम के सांसद दर्शन चौधरी ने कहा कि नानाजी देशमुख ने भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में सामाजिक जागरण और ग्रामीण विकास की नई चेतना जगाई। दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य विश्व के लिए अनुकरणीय मॉडल हैं। उन्होंने कहा कि नानाजी ने राजसत्ता छोड़कर चित्रकूट में वनवासियों का आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।

सीधी के सांसद राजेश मिश्रा ने नानाजी के सेवा और समर्पण भाव को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनके कार्य विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में मार्गदर्शक हैं। कामदगिरि पीठम के महंत मदन गोपाल दास ने कहा कि नानाजी के प्रयासों से चित्रकूट की जागृति, समृद्धि और विकास को नई दिशा मिली।

भजनों और शास्त्रीय संगीत ने बांधा समां

मुंबई से आए श्रीराम अय्यर ने सहयोगी गायक नीव कनानी और विदिता के साथ गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद ‘देवा श्री गणेशा’, ‘अच्युतम केशवम’, ‘कभी राम बनके कभी श्याम बनके’, ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’ और ‘राम राम जय राजा राम’ जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति दी। वाद्य कलाकारों ने ड्रम, तबला, कीबोर्ड, गिटार और बांसुरी की संगत से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया।

शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के कलाकारों ने ऐतिहासिक मैहर वाद्यवृंद की जुगलबंदी प्रस्तुत की। शास्त्रीय रागों, भारतीय लोक संगीत और पाश्चात्य शास्त्रीय धुनों के संगम ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कलाकारों का अभिनंदन किया। शरदोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अनुराधा पौडवाल, कैलाश खेर, अनूप जलोटा, उदित नारायण और अन्य ख्यात कलाकारों की पूर्व प्रस्तुतियों ने भी इस आयोजन को यादगार बनाया।

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