केजीएमयू के क्वीन मैरी में पहली बार आईवीएफ से गूंजी किलकारी; 15 साल बाद दंपति के घर आई नन्ही परी

अशोक यादव, लखनऊ : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रसिद्ध स्त्री रोग विभाग ‘क्वीन मैरी हॉस्पिटल’ की इन्फर्टिलिटी/IVF यूनिट ने एक ऐतिहासिक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है । अस्पताल में कोविड काल के बाद पहली सफल आईवीएफ (IVF) गर्भावस्था के सुखद परिणाम के रूप में एक दंपति के घर खुशियां पहुंची हैं। यहाँ इलाज करा रही एक 38 वर्षीय महिला ने सीजेरियन सेक्शन के माध्यम से एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है, जिसका वजन दो किलोग्राम है ।

यह उपलब्धि उन हजारों सामान्य और मध्यमवर्गीय निःसंतान दंपतियों के लिए एक बेहतरीन खुशखबरी है, जो सामाजिक लोकलाज, हीनभावना और कारपोरेट सेक्टर के बड़े आईवीएफ सेंटरों के अत्यधिक महंगे इलाज के कारण बांझपन का दंश झेलने को मजबूर रहते हैं। अब उन्हें पूरी सामाजिक प्रतिष्ठा और गोपनीयता के साथ सरकारी दर पर उच्च स्तरीय आईवीएफ इलाज मिल सकेगा।

यह पीड़ित महिला पिछले करीब 15 वर्षों से निःसंतानता की समस्या से जूझ रही थीं। लगभग एक वर्ष पूर्व उन्होंने क्वीन मैरी की इन्फर्टिलिटी यूनिट हेड प्रो. पुष्पलता शंखवार से संपर्क किया था । उनके कुशल निर्देशन में हुई आईवीएफ प्रक्रिया और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के बाद यह सुखद परिणाम सामने आया। विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने इस सफलता पर डॉ. पुष्पलता शंखवार और उनकी टीम को बधाई देते हुए इसे पूरे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया ।

उल्लेखनीय है कि क्वीन मैरी में आईवीएफ यूनिट की शुरुआत वर्ष 1993 में डॉ. लक्ष्मी सिंह द्वारा की गई थी, जिसे बाद में पूर्व एचओडी डॉ. विनीता दास ने आगे बढ़ाया। कोविड महामारी के बाद से यह यूनिट बंद जैसी हो गई थी, लेकिन अब पुनः मिली इस शानदार सफलता ने नई आशाओं का संचार किया है। भविष्य में यहाँ आईसीएसआई (ICSI) और टीईएसई (TESE) जैसी आधुनिक तकनीकों से भी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा ।

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