
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश की भूमिहीन किसान महिलाओं के श्रम और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर सामाजिक समरसता मंच, अवध प्रांत ने शुक्रवार को विश्व संवाद केंद्र, जियामऊ में प्रेसवार्ता आयोजित की। इस दौरान भूमिहीन महिला श्रमिकों की स्थिति पर आधारित शोध-प्रतिवेदन जारी किया गया। शोध दिल्ली विश्वविद्यालय की राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांता के. माथुर ने सामाजिक समरसता गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक के. श्याम प्रसाद के मार्गदर्शन में किया है।
शोधकर्ता डॉ. चंद्रकांता के. माथुर ने कहा कि भूमिहीन किसान महिलाओं को अन्नदाता के रूप में मान्यता देने के साथ भूमि, मजदूरी और निर्णय प्रक्रिया में उनका उचित अधिकार सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है, जब खेतों में मेहनत करने वाली महिला नीति-निर्धारण में भी अपनी आवाज प्रभावी ढंग से रख सके।
प्रतिवेदन में दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में केवल 7.6 प्रतिशत महिलाओं के नाम कृषि भूमि दर्ज है। वहीं करीब 85 प्रतिशत महिला श्रमशक्ति खेतों में काम करती है, लेकिन बड़ी संख्या में महिलाओं के श्रम को पारिवारिक या अवैतनिक श्रम माना जाता है। पिछले एक वर्ष में काम करने वाली महिलाओं में 18 प्रतिशत से कम को ही नकद मजदूरी मिलने की बात कही गई है। मध्य, पूर्वी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों में निर्धनता दर 73.4 से 89.8 प्रतिशत तक बताई गई है। बुंदेलखंड तथा अनुसूचित जाति समुदाय की महिलाएं इससे अधिक प्रभावित हैं।
प्रतिवेदन में महिला साक्षरता, स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। आयोजकों के अनुसार महिला साक्षरता दर पुरुषों से कम है तथा बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। भूमिहीन परिवारों में स्वास्थ्य बीमा की पहुंच भी सीमित बताई गई।
सामाजिक समरसता गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक के. श्याम प्रसाद ने अनुसूचित जाति और वंचित वर्गों की भूमिहीन महिलाओं के लिए पृथक कल्याणकारी प्रकोष्ठ गठित करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा में वर्षभर रोजगार, समान कार्य के लिए समान मजदूरी, तत्काल नकद भुगतान, खेतमजदूर कार्ड के माध्यम से डीबीटी तथा बिना भूमि गिरवी रखे विशेष ऋण और बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि किसान परिवार की महिला और भूमिहीन खेत मजदूर महिला समान परिश्रम और आकांक्षाओं की साझेदार हैं। सामाजिक समरसता का उद्देश्य दोनों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयात्री के रूप में आगे बढ़ाना है। प्रेसवार्ता में प्रांत प्रमुख राजकिशोर, शोध सहयोगी अविशा रवि और प्रांतीय टोली सदस्य बृजनंदन राजू मौजूद रहे।

