
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शनिवार 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण एवं बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स एवं सुरक्षा टुकड़ियों द्वारा तिरंगे झंडे को सलामी दी गई तथा कुलपति जी एवं अतिथियों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। ध्वजारोहण के पश्चात सभी के द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान गाया गया। सर्वप्रथम कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में ‘विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका (Role of Youth in Achieving the Goal of Viksit Bharat)’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर सामाजिक उद्यमी एवं डेक्सटेरिटी ग्लोबल (Dexterity Global) के फाउंडर और सीईओ शरद विवेक सागर मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, प्रॉक्टर प्रो. राम चंद्रा एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले दिग्गज उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए देश को केवल आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक, तकनीकी एवं पर्यावरणीय सहित सभी क्षेत्रों में सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की वर्तमान उपलब्धियां उन पूर्वजों के अथक प्रयासों और बलिदानों का परिणाम हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। ऐसे में हमारा दायित्व है कि हम उनके संघर्ष और बलिदानों को सदैव स्मरण करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कुलपति जी के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि तथा देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए युवाओं को कौशल विकास, नवाचार, सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा।

प्रो. मित्तल ने विश्वविद्यालय एवं अमेठी परिसर में विद्यार्थियों की सुविधा और शैक्षणिक विकास के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेठी परिसर में विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लैब, 24×7 विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था तथा मनोविज्ञान, अंग्रेजी और भूगोल जैसे नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गई है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा, अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दें। क्योंकि सामूहिक प्रयासों से ही आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव होगा तथा हम सच्चे अर्थों में अपने राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्य का निर्वहन कर सकेंगे।
मुख्य अतिथि एवं डेक्सटेरिटी ग्लोबल के फाउंडर और सीईओ शरद विवेक सागर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि उसने उस महान भूमि पर जन्म लिया है, जिसने विश्व को ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और मानवता की समृद्ध परंपरा दी है। उन्होंने कहा कि भारत आज विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व के अनेक विद्वान भारतीय उपनिषदों और सिद्धार्थ जैसे ग्रंथों से प्रेरणा लेते रहे हैं। भारत जितना आधुनिक और नवीन हो रहा है, उसकी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत उतनी ही प्राचीन एवं समृद्ध है। स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया था। भारत ने एशिया और अफ्रीका के अनेक देशों के लिए स्वतंत्रता एवं मानवता का मार्ग प्रशस्त किया और सदैव पूरे विश्व को साथ लेकर चलने की भावना को प्राथमिकता दी।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर मंच पर उपस्थित एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एवं अद्वितीय परिवर्तन लाने वाले 6 परिवर्तनकर्ताओं को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट करके सम्मानित किया गया। इन परिवर्तनकर्ताओं में श्रीमती वर्षा वर्मा को ‘एक कोशिश ऐसी भी’ संस्था के माध्यम से अंतिम संस्कार में सहयोग, निःशुल्क एंबुलेंस एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर किए जा रहे मानवीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
देवेंद्र अस्थाना को मालवीय मिशन के माध्यम से कुष्ठ रोग से प्रभावित बच्चों एवं वनवासी बच्चों के कल्याण और उनके बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे कार्यों एवं श्री सुधीर कुमार गुप्ता को वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से विशेष रूप से थारू जनजाति के सामाजिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्री एफ.सी. मोगा एवं श्री गिरीश पीपल को उद्यमिता एवं उद्योग के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए तथा डॉ. टी. दामोदरन, निदेशक, आईसीएआर – इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रापिकल हार्टिकल्चर, लखनऊ को कृषि के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण वैज्ञानिक, शोध एवं तकनीकी योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे नृत्य एवं गायन की प्रस्तुति दी गयी । कार्यक्रम का समापन मिष्ठान वितरण के साथ हुआ।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
