भ्रामक सूचनाओं से बचें, विश्वविद्यालय में अनुशासन, शैक्षणिक वातावरण – हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : प्रो. मित्तल, कुलपति

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने नए शैक्षणिक सत्र 2026–27 के शुभारंभ पर विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुये कहा कि बीबीएयू सदैव विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता आया है। साथ ही विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, छात्रवृत्ति योजनाएँ, अनुसंधान को प्रोत्साहन, छात्रावास, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, परामर्श सेवाएँ, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, लैंगिक संवेदनशीलता, शिकायत निवारण प्रणाली तथा सुरक्षित एवं समावेशी परिसर उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर कार्य कर रहा है। विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु विश्वविद्यालय के द्वार सदैव खुले हैं तथा संवाद एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है। किंतु अनुशासनहीनता, हिंसा, दबाव की राजनीति तथा विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी गतिविधियाँ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं की जा सकती हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए संस्थान की गरिमा, शैक्षणिक वातावरण एवं विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सभी निर्णय निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए लिए जाते हैं। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षित एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तथा पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहा है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध एवं नवाचार के साथ-साथ उत्तरदायी नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप विश्वविद्यालय प्रशासन प्रत्येक विषय पर तथ्यों, नियमों एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेने की नीति का पालन करता है। इसीलिये विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. मित्तल ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को संदेश दिया है कि वे सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित भ्रामक जानकारियों पर ध्यान न दें।

उल्लेखनीय है कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध उपलब्धियों के लिए निरंतर प्रतिष्ठा अर्जित कर रहा है। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा A++ ग्रेड प्रदान किया गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने NIRF 2025 में विश्वविद्यालय श्रेणी में देशभर में 37वाँ स्थान तथा समग्र (Overall) श्रेणी में 69वाँ स्थान प्राप्त किया है। वहीं IIRF 2026 की केंद्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने 19वाँ स्थान हासिल किया है, जो शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के प्रति विश्वविद्यालय की सतत प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

ज्ञातव्य है कि दिनांक 26 अप्रैल 2026 की रात को विश्वविद्यालय की एक बीमार छात्रा की मृत्यु हो गयी थी जो कि मूल रूप से वाराणसी की रहने वाली थी तथा अपने परिजनों साथ दिनांक 20 अप्रैल को वाराणसी चली गई थी। साथ ही छात्रावास के रिकार्ड के अनुसार छात्रा ने दिनांक 9 अप्रैल के पश्चात मेस में भोजन नहीं किया था। छात्रा की मृत्यु के उपरांत दिनांक 28 अप्रैल को रात्रि में परिसर के कुछ विद्यार्थियों द्वारा कुलपति आवास का घेराव किया गया तथा कुलपति आवास में तोड़-फोड़ एवं लूटपाट की गयी और विश्वविद्यालय की संपत्ति को क्षति पहुँचाने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। उक्त घटनाओं को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया तथा संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अनुशासन समिति का गठन किया।

अनुशासन समिति के समक्ष प्रस्तुत चिकित्सीय अभिलेखों एवं उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार संबंधित छात्रा की मृत्यु का कारण निमोनिया एवं श्वास संबंधी दिक्कतें पाया गया। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ असामाजिक तत्वों एवं विद्यार्थियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक एवं अपुष्ट जानकारी प्रसारित करते हुए छात्रा की मृत्यु को विश्वविद्यालय के छात्रावास के भोजन से हुई कथित फूड पॉइजनिंग से जोड़ने का प्रयास किया गया, जबकि उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्य इस दावे की पुष्टि नहीं करते हैं।

समिति द्वारा विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच करते हुए उपलब्ध सभी साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया। जांच के दौरान सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, वीडियो फुटेज, फोटोग्राफ, संबंधित व्यक्तियों के बयान, सुरक्षाकर्मियों द्वारा लिये गये साक्ष्य, दस्तावेजी साक्ष्य एवं अन्य उपलब्ध तथ्यों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा गठित अनुशासन समिति ने संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए किसी भी प्रकार का एकपक्षीय निर्णय नहीं लिया। समिति ने संबंधित विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का अवसर प्रदान किया तथा एक-एक विद्यार्थी से विस्तारपूर्वक बातचीत की। इस दौरान उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एवं दस्तावेजी प्रमाण संबंधित विद्यार्थियों को भी दिखाए गए तथा उनके पक्ष एवं स्पष्टीकरण को विस्तार से दर्ज किया गया। समिति ने सभी पक्षों को सुनने, प्रत्येक साक्ष्य का गहन परीक्षण करने तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन करने के उपरांत सर्वसम्मति से अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत कीं, जिनके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

अनुशासन समिति की सर्वसम्मत संस्तुतियों एवं विश्वविद्यालय के प्रचलित नियमों, अध्यादेशों तथा अनुशासनात्मक प्रावधानों के अनुरूप विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 26 वर्तमान एवं 4 पूर्व विद्यार्थियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। निर्धारित दंड के अंतर्गत संबंधित विद्यार्थियों पर आर्थिक दंड लगाया गया है, जो कि कई दोषी विद्यार्थियों द्वारा अभी तक जमा नहीं किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश पर नियमानुसार प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ विद्यार्थियों को निर्धारित अवधि के लिए एक सप्ताह तथा कुछ को उससे ज्यादा समय हेतु निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई पूरी तरह से विश्वविद्यालय के नियमों एवं अनुशासन समिति की संस्तुतियों के अनुरूप की गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिनकी भूमिका 17 सितंबर 2025 को कुलपति कार्यालय में हुई तोड़फोड़ एवं विश्वविद्यालय संपत्ति को क्षति पहुँचाने की घटना में भी पाई गई थी। विश्वविद्यालय किसी भी परिस्थिति में हिंसा, तोड़फोड़, अव्यवस्था अथवा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं करता तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करना विश्वविद्यालय का दायित्व है।

विश्वविद्यालय प्रशासन सभी विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील करता है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक, अपुष्ट अथवा सोशल मीडिया पर प्रसारित अफवाहों पर विश्वास न करें। किसी भी जानकारी के लिए केवल विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं एवं प्रामाणिक माध्यमों पर ही भरोसा करें। विश्वविद्यालय सभी विद्यार्थियों से अपेक्षा करता है कि वे अनुशासन, शैक्षणिक मर्यादा एवं पारस्परिक सौहार्द बनाए रखते हुए विश्वविद्यालय की गरिमा को अक्षुण्ण रखने में अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करें।

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