
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ/वाराणसी : उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सारनाथ, वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा, शांति और मानव कल्याण के संदेश आज भी सम्पूर्ण विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। वैश्विक अस्थिरता, संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों के वर्तमान दौर में भगवान बुद्ध के कालातीत विचार मानवता को शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखा रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत आज अपनी प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को विश्व समुदाय के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की प्रथम धम्मदेशना-स्थली सारनाथ का यूनेस्को की ‘विश्व धरोहर सूची’ में शामिल होना भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को प्राप्त एक ऐतिहासिक वैश्विक सम्मान है। यह उपलब्धि न केवल भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि सारनाथ की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयां प्रदान करती है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सारनाथ वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के उपरांत अपना प्रथम उपदेश देकर धम्मचक्र प्रवर्तन किया था। यहीं से करुणा, सत्य, अहिंसा, मैत्री और मानव कल्याण का संदेश विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचा। सारनाथ आज भी विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, ज्ञान एवं शांति का प्रमुख केंद्र है।

मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं किसी एक देश, समाज अथवा समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। भगवान बुद्ध ने मानव जीवन में करुणा, सदाचार, संयम, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को सर्वोच्च महत्व दिया। उनके विचारों को अपनाकर ही विश्व में स्थायी शांति, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व भगवान बुद्ध के महान संदेशों को स्मरण करने तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिवस हमें सत्य, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मानव सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपने आचरण में उतारते हुए समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव आदरणीय श्री शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे जी, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी जी, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो, सम्मानित भिक्षुगण तथा अन्य गणमान्यजन की गरिमामयी उपस्थिति रही।