
अशोक यादव, लखनऊ / मेरठ : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार जन भवन के गांधी सभागार में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध वित्तपोषित एवं शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा अपने-अपने संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों, उपलब्धियों, नवाचारों एवं विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तुतिकरण दिया गया।
बैठक में राज्यपाल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाने, विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं शोधपरक शिक्षा से जोड़ने तथा महाविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया कि वह महाविद्यालयों को ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ योजना से जोड़ने में सक्रिय सहयोग प्रदान करे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी एवं शिक्षक इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को विश्वस्तरीय शोध पत्रिकाओं, जर्नल्स एवं शैक्षणिक सामग्री तक सरल एवं निःशुल्क पहुंच उपलब्ध हो सकेगी। इससे विशेष रूप से छोटे शहरों एवं संसाधनविहीन महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री प्राप्त होगी तथा शोध एवं नवाचार को नई गति मिलेगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकालय जाने और पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाए। विद्यार्थी जिन महापुरुषों, ऐतिहासिक स्थलों अथवा विषयों के बारे में पढ़ें, उनके संबंध में शोध करें, जानकारी प्राप्त करें तथा यदि संभव हो तो उन स्थलों का भ्रमण भी करें। भ्रमण के उपरांत विद्यार्थी अपने अनुभव लिखें तथा अध्यापक भी विद्यार्थियों के साथ बैठकर उन विषयों पर चर्चा करें। श्रेष्ठ चर्चाओं एवं उत्कृष्ट आलेखों को दीक्षांत समारोह के अवसर पर पुरस्कृत किया जाय ।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में उपलब्ध पांडुलिपियों एवं प्राचीन पुस्तकों का अध्ययन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने निर्देश दिया कि पुस्तकालयों में उपलब्ध दुर्लभ पुस्तकों एवं पांडुलिपियों का समुचित प्रदर्शन किया जाए, ताकि विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास एवं प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को समझ सकें। पांडुलिपियों के अध्ययन से विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति विकसित होगी तथा उन्हें भारतीय विरासत को जानने और समझने का अवसर प्राप्त होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों के लिए स्थानीय भ्रमण के साथ-साथ अन्य राज्यों एवं आवश्यकता अनुसार अन्य देशों के शैक्षणिक भ्रमण भी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन भ्रमणों की सम्पूर्ण व्यवस्था विद्यार्थी स्वयं करें, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। भारत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञान एवं दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा। भ्रमण के उपरांत विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अनुभवों एवं सीख पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं तथा उनके संकलन के रूप में पुस्तक भी तैयार की जाए।
राज्यपाल जी ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी एवं व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाना आवश्यक है। विद्यार्थी यह भी जानें कि दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुएं, जैसे वस्त्र आदि, किस प्रकार तैयार होते हैं और उनकी मूल प्रक्रिया क्या है। इससे विद्यार्थी समाज, श्रम एवं उत्पादन प्रणाली से जुड़ेंगे तथा उनमें संवेदनशीलता एवं व्यावहारिक समझ विकसित होगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी महाविद्यालयों में जनपद स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं तथा विजेताओं के मध्य आगे प्रतियोगिताएं कराकर श्रेष्ठ प्रतिभाओं को दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया जाए। प्राचार्यों एवं अध्यापकों के मध्य भी प्रतियोगिताएं आयोजित हों तथा महाविद्यालयों के विकास, उत्कृष्ट शोध, पुस्तक लेखन, प्रकाशन एवं नवाचारपूर्ण परियोजनाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाए। विभिन्न परियोजनाओं एवं नवाचारों पर चर्चा, प्रस्तुतीकरण एवं संवाद की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।
राज्यपाल जी ने जन भवन में विकसित ‘मियावाकी वन’ से प्रेरणा लेते हुए सभी महाविद्यालयों में वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे वृक्ष लगाए जाएं जो फल देने के साथ-साथ छाया भी प्रदान करें तथा पर्यावरण संरक्षण में सहायक हों। उन्होंने सभी प्राचार्यों से जन भवन में किए गए नवाचारों का अवलोकन करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में जाकर प्रयोगात्मक कार्य करने का अवसर भी प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके। उन्होंने विभागीय मंत्रियों, कुलपति, कुलसचिव, वित्त नियंत्रक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को महाविद्यालयों का नियमित भ्रमण कर वहां की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं कौशल विकास आधारित पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा प्रदान की जाए जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें तथा रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार के निर्देशानुसार जनभवन, लखनऊ में विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाए जाते हैं तथा विश्वविद्यालयों में भी स्थापना दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने महाविद्यालयों में भी स्थापना दिवस मनाने के निर्देश देते हुए कहा कि सकारात्मक सोच, उत्कृष्ट कार्य एवं निरंतर प्रयासों से महाविद्यालयों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की तैयारियों को गंभीरता से लेने के निर्देश देते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि महाविद्यालय अपने प्रस्तुतिकरण को प्रभावी बनाएं तथा अपनी रैंकिंग में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करें। जहां कहीं भी अच्छा कार्य हो रहा हो, उसे अपनाने का प्रयास किया जाए। उत्कृष्टता की दिशा में स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी महाविद्यालय अपनी विशिष्टताओं, रोजगारपरक प्रयासों, विद्यार्थियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण तथा रोजगार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की जानकारी जन भवन को उपलब्ध कराएं। प्रत्येक संस्थान को अपने कार्यों एवं परिणामों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण करना चाहिए।
राज्यपाल ने बताया कि बलिया जनपद के एक कृषक को प्रेरणा स्वरूप दो गायें उपलब्ध कराई गई थीं और आज वह कृषक स्वयं अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, सही मार्गदर्शन एवं निरंतर प्रयासों से उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है। इसी प्रकार सभी महाविद्यालय भी उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ कार्य करें और समाज में प्रेरणास्रोत बनें।
इस अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विद्यार्थियों द्वारा गुजरात विषय पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। डॉक्यूमेंट्री में दर्शाया गया कि किस प्रकार भुज एवं कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप से गुजरात को व्यापक क्षति हुई थी तथा उसके उपरांत माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भुज एवं कच्छ के पुनर्निर्माण और विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए, जिससे क्षेत्र में नए विकास एवं आधारभूत संरचना का निर्माण संभव हो सका। राज्यपाल जी की नतिनी संस्कृति जयाना की डेब्यू फिल्म ‘कृष्णावतारम् – पार्ट वन – द हार्ट‘ ट्रेलर भी दिखाया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्यपाल जी के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ निरंतर आयोजित हो रही बैठकों के सकारात्मक परिणाम प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहे हैं। राज्यपाल जी के नेतृत्व एवं प्रेरणा से उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट ग्रेड हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जी विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में सक्रिय योगदान दें। विश्वविद्यालय मजबूत होंगे तो उच्च शिक्षा सशक्त होगी और उच्च शिक्षा सशक्त होगी तो प्रदेश एवं देश का विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने महाविद्यालयों को वृक्षारोपण, विशेष रूप से ‘मियावाकी वन’ एवं फलदार वृक्ष लगाने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज की यह बैठक एक लघु कार्यशाला के समान रही, जिससे सभी को बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने प्राचार्यों एवं शिक्षकों से आह्वान किया कि बैठक में प्राप्त सुझावों एवं नवाचारों को अपने-अपने महाविद्यालयों में अवश्य लागू करें।
विशेष कार्याधिकारी श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि राज्यपाल जी के मार्गदर्शन में आयोजित लगातार बैठकों एवं दिए गए सुझावों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज प्रदेश के अठारह विश्वविद्यालय ए, ‘ए प्लस’ एवं ‘ए प्लस प्लस’ श्रेणी में स्थान प्राप्त कर चुके हैं। महाविद्यालयों में भी इसी प्रकार की गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता विकसित करने के उद्देश्य से निरंतर इस प्रकार की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि राज्यपाल जी की प्रेरणा से जन भवन का प्रत्येक कोना नवाचार एवं सकारात्मक सोच का संदेश देता है। महाविद्यालयों को भी अपने संस्थानों में नवाचार, शोध, प्रकाशन, पेटेंट, उद्यमिता एवं रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर प्लेसमेंट उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल जी के मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं दूरदर्शी विजन के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ० पंकज एल० जानी, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह, निदेशक उच्च शिक्षा बी० एल० शर्मा, जन भवन के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
