
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में गुरुवार 7 मई को डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र( Dr. Ambedkar Centre of Excellence) एवं सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में ‘डॉ. अम्बेडकर का सामाजिक न्याय का दृष्टिकोण : शब्दों से परे समानता (Dr. B.R. Ambedkar’s Vision of Social Justice: Equality Beyond Words) विषय पर संगोष्ठी एवं वाद - विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो.एस. विक्टर बाबू ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश शेड्यूल कास्ट फाइनेंस एंड डेवलपमेंट, कार्पोरेशन लिमिटेड के वाइस चेयरमैन बिश्व नाथ उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एम. रवि कुमार , डॉ. एन.के.एस. मोरे एवं डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो. शशि कुमार मौजूद रहे।
डीन ऑफ अकेडमिक प्रो. एस. विक्टर बाबू ने अपने संबोधन में कहा कि बाबासाहेब का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का अद्वितीय स्रोत है। उनके संघर्ष, दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी सोच से यह सीख मिलती है कि यदि व्यक्ति के पास स्पष्ट लक्ष्य और कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो वह किसी भी कठिनाई को पार करते हुए अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और अटूट इच्छाशक्ति ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं।
मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश शेड्यूल कास्ट फाइनेंस एंड डेवलपमेंट, कार्पोरेशन लिमिटेड के वाइस चेयरमैन बिश्व नाथ ने चर्चा के दौरान कहा कि डॉ. अम्बेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के ऐसे महान चिंतक थे जिन्होंने अपने ज्ञान, संघर्ष और दूरदर्शिता से पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उन्हें अत्यंत सम्मान और आदर की दृष्टि से देखा गया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने भारतीय संविधान के माध्यम से देश को लोकतांत्रिक मूल्यों, समान अधिकारों और सामाजिक न्याय की ऐसी दिशा दी, जो आज भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एम. रवि कुमार ने कहा कि बाबासाहेब आधुनिक भारत के वास्तविक निर्माताओं में से एक थे, जिन्होंने अपने विचारों, संघर्ष और दूरदर्शिता से राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने भारतीय संविधान के माध्यम से देश को लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय की मजबूत आधारशिला दी। प्रो. रवि ने कहा कि बाबासाहेब का सपना एक ऐसे भारत का निर्माण करना था, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। उनका जीवन आज भी युवाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
प्रो. शशि कुमार एवं डॉ.एन.के.एस. मोरे ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं द्वारा बाबासाहेब के संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण तथा सामाजिक न्याय की भावना को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया। साथ ही आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर “डॉ. अम्बेडकर का सामाजिक न्याय का दृष्टिकोण : शब्दों से परे समानता” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करते हुए अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। इस प्रतियोगिता में रितिका ने प्रथम, वैभव प्रकाश ने द्वितीय तथा देवेश कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जिन्हें मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।