माँ मंदाकिनी के निर्मल, अविरल प्रवाह हेतु आरोग्यधाम में दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा माँ मंदाकिनी के अविरल, निर्मल प्रवाह, सीवेज प्रबंधन एवं पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर 25-26 अप्रैल को आरोग्यधाम सभागार में दो दिवसीय विचार-विमर्श बैठक-सह-कार्यशाला एवं क्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें आईआईटी, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता हो रही है ।

कार्यशाला का शुभारंभ दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन के स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। जिसमें उन्होंने कहा कि चित्रकूट के मूल स्वरूप को बनाये रखते हुए इसके विकास हेतु जनता की पहल एवं पुरूषार्थ तथा शासकीय व सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयत्न से बेहतर बनाना है।

इस कार्यशाला में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के निदेशक डॉ अजीत कुमार विद्यार्थी, प्रसिद्व पर्यावरणविद एवं परिस्थितिकीविद प्रो सीआर बाबू दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ अनूप चतुर्वेदी वैज्ञानिक एवं रूपेंद्र कुमार वैज्ञानिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल, डॉ फैयाज अहमद खुदसर वैज्ञानिक यमुना डाइवर्सिटी पार्क, कमल तिवारी मैनेजिंग डायरेक्टर/ सीईओ डायकी एक्सेस प्राइवेट लिमिटेड, प्रो ए ए काजमी आईआईटी रुड़की, डॉ प्रवीण कुमार निदेशक गंगा मिशन, वितुष लूथरा सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरमेंट इंजीनियरिंग संगठन, सतीश मेहता आईआईटी एल्यूमिनी सोशल फंड, आर श्रीनिवासन आईआईटी, प्रो एसपी गौतम पूर्व अध्यक्ष केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल पुरुष पद्मश्री उमाशंकर पांडे, अजय शर्मा जे के सीमेंट पन्ना यूनिट, रत्नेश श्रीवास्तव अल्ट्राटेक सीमेंट आदित्य बिरला ग्रुप भोपाल, शैलेंद्र शुक्ला चीफ इंजीनियर मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट डिपार्मेंट भोपाल, सीताराम टैगोर कंसल्टेंट ई पी सी ओ भोपाल, डॉ सुधा सिंह लिमिनोलॉजिस्ट ईपीसीओ, प्रभात झा इंजीनियर ईपीसीओ, सुधांशु तिवारी क्षेत्रीय अधिकारी एमपीपीसीबी सतना, विपिन कुमार मिश्रा वैज्ञानिक केंद्रीय भूजल बोर्ड राज्य इकाई प्रयागराज, सत्येंद्र चौहान डिक्सी एक्सिस इंडिया प्रा0 लि0, अंकित सोनी मुख्य नगरपरिषद अधिकारी, अभय महाजन संगठन सचिव दीनदयाल शोध संस्थान , वसंत पंडित कोषाध्यक्ष दीनदयाल शोध संस्थान आदि प्रमुख उपस्थित रहे।

डीआरआई के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने कहा कि चित्रकूट, जो कि मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक क्षेत्र है, अपनी जीवनरेखा माँ मंदाकिनी नदी के लिए प्रसिद्ध है। विगत कुछ वर्षों में इस क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन तथा नदी की पारिस्थितिकी बढ़ते मानवजनित दबाव एवं आवर्ती मौसमी बाढ़ के कारण प्रभावित हुई है। इन चुनौतियों के समाधान हेतु एक समन्वित, बहु-क्षेत्रीय एवं कार्यान्वयन-उन्मुख दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के निदेशक डॉ अजीत कुमार विद्यार्थी ने कहा कि इस परिपेक्ष में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा अपने अनुभव के आधार पर चित्रकूट क्षेत्र में पर्यावरणीय पुनरुद्धार, नदी के निर्मल अविरल स्वरूप को बनाये रखने एवं बाढ़ प्रबंधन हेतु एक व्यवहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने की पहल की गई है। जिसके लिए 25, 26 को चित्रकूट में दो दिवसीय विचार-विमर्श बैठक-सह-कार्यशाला एवं क्षेत्र भ्रमण का आयोजन किया जा रहा है।

इस दो दिवसीय आयोजन के प्रथम दिवस विकेन्द्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्रों की स्थापना हेतु 12 संभावित स्थलों का निरीक्षण तथा ब्रह्मकुंड, बरहा, किल्होरा से रामघाट तक मंदाकिनी/पैसुनि नदी का सर्वेक्षण, मंदाकिनी नदी के नालों एवं अन्य प्रदूषण स्रोतों का सर्वेक्षण, मंदाकिनी नदी के घाटों एवं चित्रकूट नगर क्षेत्र के अन्य स्थानों पर ठोस अपशिष्ट व प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का सर्वेक्षण, घासभूमि/जैव विविधता पार्क/निर्मित आर्द्रभूमि आदि के विकास हेतु संभावित स्थलों की पहचान व बाढ़ जोखिम को कम करने हेतु जलग्रहण क्षेत्र की स्थिति, जल निकासी पैटर्न तथा प्रकृति-आधारित हस्तक्षेपों (जैसे आर्द्रभूमि, वनस्पति, रिचार्ज संरचनाएं) की संभावनाओं का आकलन विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है । इन महत्वपूर्ण स्थलों का क्षेत्र भ्रमण पश्चात विषय विशेषज्ञों के साथ द्वितीय दिवस में विस्तृत तकनीकी विचार-विमर्श आयोजित किया जाएगा और कार्ययोजना व रोडमैप हेतु फील्ड सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर मंथन होगा।

प्रथम दिवस की कार्यशाला में प्रो सी आर बाबू , प्रो एस पी गौतम , सतीश मेहता, प्रो ए एस काजमी, फैयाज अहमद खुदसर, आर श्रीनिवासन, शैलेश शुक्ला आदि ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये।

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