
अनुपूरक न्यूज़ एजेंसी, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने शुक्रवार लखनऊ स्थित सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्यालय के सभागार में विभागीय कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मंत्री ने कड़े तेवर अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जनहित की परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लेटलतीफी या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि विभाग की सफलता का एकमात्र पैमाना किसान की संतुष्टि है।
समीक्षा बैठक के दौरान जल शक्ति मंत्री ने कृषि में जल के इष्टतम उपयोग पर जोर देते हुए सभी मुख्य अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक मुख्य अभियंता अपने-अपने संगठन और परिक्षेत्र में “वन ड्रॉप मोर क्रॉप” (प्रति बूंद अधिक फसल) के सिद्धांत पर आधारित कम से कम एक नई और नवाचारी परियोजना का खाका तैयार करें। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और घटते जल स्तर के बीच हमें सिंचाई की ऐसी तकनीकें विकसित करनी होंगी जो कम पानी में किसानों को अधिकतम पैदावार दे सकें।
जल शक्ति मंत्री ने संगठनवार समीक्षा करते हुए मुख्य अभियंताओं से प्रदेश की नहरों, रजबाहों, अल्पिकाओं और साइफन की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा मांगा। उन्होंने बैराजों, फीडर और रेगुलेटरों के संचालन में तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए और कहा कि फील्ड अफसर स्वयं मौके पर जाकर जल वितरण व्यवस्था का निरीक्षण करें।
आगामी मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर मंत्री ने बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संवेदनशील और अति-संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ बचाव के कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और कार्य की समयबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी परियोजना में मानक के विपरीत कार्य पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी मानसून के दृष्टिगत ड्रेन की सफाई 15 जून तक करवा लें।

बैठक के समापन पर स्वतंत्र देव सिंह ने निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचाने के लिए पारदर्शी जल प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए। उन्होंने अधिकारियों को आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श करते हुए निर्देशित किया कि लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण कर जनता को समर्पित किया जाए।
बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव, अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष संदीप कुमार एवं समस्त संगठनों के मुख्य अभियंता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।