राज्यमंत्री नरेन्द्र कश्यप की अध्यक्षता में दिव्यांगता पर ‘राज्य सलाहकार बोर्ड’ की 08वीं बैठक संपन्न

सूर्योदय भारत समाचार सेवा,लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप की अध्यक्षता में दिव्यांगता पर गठित ‘राज्य सहालकार बोर्ड’ की 08वीं बैठक मंगलवार लखनऊ स्थित योजना भवन के ‘वैचारिकी’ सभा कक्ष में आयोजित हुई। बैठक का शुभारम्भ प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग राजेश कुमार सिंह ने मंत्री को पुष्प गुच्छ देकर किया।

मंत्री कश्यप ने बताया कि राज्य सलाहकार बोर्ड का उद्देश्य दिव्यांगजन अधिकारों की निगरानी करना, समावेशी विकास को गति देना, विभागीय नीतियों/कार्यक्रमों का मूल्यांकन, दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें शासकीय योजनाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ दिलाना है। बैठक में पूर्व बैठक की कार्यवृत्ति तथा उस पर की गई अनुपालन आख्या प्रस्तुत की गयी। कश्यप जी ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि प्रदेश भर में मण्डल एवं जनपद स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जाए, जहां पात्र दिव्यांगजन को समस्त सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं उसको मिलने वाले लाभ से अवगत कराया जा सकें। ज़िला दिव्यांग अधिकारी व्यावहारिक रूप से रूचि लेते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को नियमानुसार विकास प्राधिकरणों (यूपीडा व औद्योगिक प्राधिकरणों) द्वारा दुकानों के आवंटन में 03 प्रतिशत के स्थान पर 05 प्रतिशत का आरक्षण लागू करें, जो कि बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में दिव्यांगजनों को प्राथमिकता/आरक्षण की स्थिति पर चर्चा हुई। दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान (पेंशन) राशि बढ़ाकर ₹ 1,000/- प्रतिमाह की गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 10,44,022 पात्र दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जा चुका है। कुष्ठावस्था पेंशन दर ₹ 3,000/- प्रतिमाह की दर से दी जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 13,734 लाभार्थियों को पेंशन उपलब्ध कराई गयी। दुकान निर्माण हेतु ₹ 20,000/- तथा संचालन हेतु 10000/- का अनुदान दिया जाता है। निर्माण एवं संचालन राशि को पूर्ण रूप से अनुदान में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण अनुदान सीमा बढ़ाकर ₹ 15,000/- की गई है।

अब इसमें स्मार्ट फोन, टैबलेट एवं डेजी प्लेयर भी शामिल हैं। 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले (16 वर्ष से ऊपर) व्यक्तियों को ₹ 25,000/- तक का अनुदान दिया जा रहा है। चालू वर्ष में प्रति जनपद 15 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल का भौतिक लक्ष्य निर्धारित है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 21 विशेष विद्यालय तथा 07 नवीन समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल पद्धति से शिक्षा दी जा रही है तथा छात्रवृत्ति बढ़ाकर ₹ 4,000/- प्रतिमाह की गई है। बचपन डे-केयर सेंटर 03 से 07 वर्ष के दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित व मानसिक मंदित बच्चों के लिए 25 केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1,431 बच्चे पंजीकृत हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण तथा आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित विशेष विद्यालयों में विद्यार्थियों को आधुनिक एवं समग्र सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के समग्र विकास एवं उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को उसकी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वह आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके।

कश्यप ने बताया कि सरकार का लक्ष्य केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विभाग द्वारा विभिन्न पुनर्वास कार्यक्रमों, परामर्श सेवाओं तथा जागरूकता अभियानों का भी नियमित संचालन किया जाता है। दिव्यांगजन की सुविधा के अन्तर्गत सार्वजनिक भवनों की पहचान कर उन्हें दिव्यांगजन हितैषी बनाए जाने की प्रक्रिया में तत्परता बरती जाए। अभियान के प्रथम एवं द्वितीय चरण में चयनित जनपदों के सरकारी भवनों में सुगम्यता संबंधी आवश्यक सुधार कार्य कराए गए हैं, जिससे दिव्यांगजन बिना किसी बाधा के सरकारी सेवाओं तक पहुँच सकें। उन्होंने कहा कि विभिन्न जनपदों के चिन्हित भवनों का एक्सेस ऑडिट कराया जाए तथा ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर भवनों में रैम्प, हैंडरेल, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, टैक्टाइल पथ, संकेतक, आवश्यक संरचनात्मक संशोधन तथा अन्य सुगम्यता संबंधी सुविधाएँ विकसित की जाए, ताकि दिव्यांगजन सार्वजनिक भवनों एवं कार्यालयों तक सहजता से पहुँच सकें।

बैठक में एम.एल.सी. ध्रुव त्रिपाठी, विधायक देवेन्द्र प्रताप सिंह, रामवीर सिंह, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अमित सिंह एवं रणजीत सिंह, के अतिरिक्त उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा, वित्त, कार्मिक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, औद्योगिक विकास, श्रम एवं सेवायोजन, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन, खेल-कूद, परिवहन, खाद्य एवं रसद, राजस्व तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले विशेषज्ञों में डाॅ0 उत्तम ओझा, कुल सचिव जगद्गुरू रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट, कुल सचिव डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि के अतिरिक्त शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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