
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को मत्स्य पालन विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती तथा महिला सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बैकयार्ड मत्स्य पालन जैसी नवाचार आधारित योजनाओं का व्यापक विस्तार करते हुए अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इससे जोड़ा जाए तथा उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अनेक अभिनव योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना इसी दिशा में एक सफल मॉडल के रूप में उभरी है, जिसने महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को भी नई पहचान दी है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं मत्स्य निदेशालय की संयुक्त पहल के अंतर्गत प्रदेश के 10 जनपदों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना से जोड़ा गया है। इसके तहत महिलाओं द्वारा अपने घर के निकट 10,000 लीटर क्षमता एवं 4 मीटर व्यास वाले आधुनिक बायोफ्लॉक टैंकों में सिंघी मछली का वैज्ञानिक ढंग से पालन किया जा रहा है। लगभग आठ माह की उत्पादन अवधि वाली यह तकनीक कम स्थान, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन सुनिश्चित कर रही है, जिससे महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
मौर्य ने कहा कि सिंघी मछली उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है। कम वसा होने के कारण यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है तथा बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा बुजुर्गों के पोषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से सिंघी मछली के उत्पादन में वृद्धि कर प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ बनाया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस परियोजना का दायरा और बढ़ाया जाए तथा अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इससे जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, वहां के सफल अनुभवों को अन्य जनपदों में भी लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में व्यापक वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक महिला द्वारा एक बायोफ्लॉक टैंक स्थापित करने में लगभग ₹60,000 का निवेश किया जाता है, जबकि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत प्रति टैंक ₹30,000 का एकमुश्त अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। परियोजना के अंतर्गत न्यूनतम बाय-बैक मूल्य ₹250 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है, जबकि वर्तमान में महिलाओं को बाजार में लगभग ₹300 प्रति किलोग्राम तक का मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे उन्हें उल्लेखनीय आर्थिक लाभ मिल रहा है।
मौर्य ने कहा कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मत्स्य पालन का व्यापक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। उन्हें जल गुणवत्ता प्रबंधन, टैंक प्रबंधन, रोग नियंत्रण, आहार एवं पोषण प्रबंधन तथा बायोफ्लॉक प्रणाली के वैज्ञानिक संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही सफल इकाइयों के भ्रमण (एक्सपोज़र विजिट) के माध्यम से व्यवहारिक अनुभव भी उपलब्ध कराया जा रहा है। तकनीकी संस्थाओं के सहयोग से मछली बीज की उपलब्धता, रोग उपचार, चारा प्रबंधन तथा मृत्यु दर कम करने के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के 10 जनपदों में 850 बायोफ्लॉक टैंकों की स्थापना की जा चुकी है तथा 11.5 मीट्रिक टन सिंघी मछली का सफल उत्पादन एवं हार्वेस्टिंग की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 173 मत्स्य उत्पादक समूहों का गठन किया गया है, जिनसे 3,110 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा गया है। प्रथम उत्पादन चक्र में महिलाओं को प्रति टैंक औसतन ₹30,000 से ₹40,000 तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। वहीं अब तक 233 महिलाओं को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत अनुदान का लाभ भी प्रदान किया जा चुका है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे महिलाएं इस तकनीक में दक्ष होती जाएंगी, उनकी आय में और अधिक वृद्धि होगी। घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी इस परियोजना को आसानी से संचालित किया जा सकता है। महिलाएं अपने घर से ही उत्पादित मछलियों का विपणन कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान कर रही हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना केवल अतिरिक्त आय का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सम्मानजनक एवं सतत आजीविका के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए इसे प्रदेश के अधिक से अधिक जनपदों तक विस्तार दिया जाए, ताकि अधिकाधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकें और ग्रामीण उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता एवं समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे।