
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष-पूर्व मंत्री अजय राय ने मंगलवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल में मिलाये जाने वाले एथेनाॅल के सम्बन्ध में देश की जनता में उपजे प्रश्नों पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए करोड़ों भारतीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा, देश के जल संसाधनों, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण, परिवहन व्यवस्था तथा सरकार की नीतियों पर जनता के विश्वास, पूर्ण पारदर्शिता, स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को तेजी से लागू किया जा रहा है तथा भविष्य में E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधनों की दिशा में भी नीति बनाई जा रही है। यह केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि ऐसा निर्णय है जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में करोड़ों भारतीय परिवारों, देश की अर्थव्यवस्था, जल संसाधनों, कृषि, परिवहन व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं की जीवनभर की बचत पर पड़ने वाला है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि देश में 35 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, छोटे व्यापारियों, टैक्सी एवं ऑटो चालकों के हैं। अधिकांश नागरिक एक बार वाहन खरीदने के बाद 10 से 20 वर्षों तक उसी का उपयोग करते हैं। उन्होने सवाल किया कि क्या हमारे देश की करोड़ों जनता बार बार अपने वाहन बदल सकती है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आज जब केन्द्र सरकार द्वारा E20 के अनुरूप वाहन खरीदने की अपेक्षा की जा रही है और E85 एवं E100 जैसे ईंधनों की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, तो स्वाभाविक प्रश्न है कि क्या वर्तमान E20 Compatible वाहन भी कुछ वर्षों बाद अनुपयुक्त नहीं हो जाएंगे? क्या करोड़ों भारतीयों से बार-बार नया वाहन खरीदने की अपेक्षा करना न्यायसंगत है? यह केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और उनकी जीवनभर की पूँजी का प्रश्न है।
यदि E20, E85 और E100 पूरी तरह सुरक्षित एवं भविष्य के सर्वोत्तम ईंधन हैं, तो उनसे संबंधित सभी स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन, परीक्षण रिपोर्ट और दीर्घकालिक इंजन परीक्षण सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? और यदि सभी वाहन समान रूप से उपयुक्त हैं, तो E20 Compatible, Flex Fuel, E85 Compatible, E85 Compatible तथा E100 Compatible जैसी अलग-अलग श्रेणियाँ बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
राय ने कहा कि इससे ईंधन की गुणवत्ता, माइलेज और उपभोक्ता का अधिकार क्या प्रभावित नहीं होगा। जबकि वैज्ञानिक तथ्य है कि पेट्रोल और एथेनॉल दो भिन्न रासायनिक ईंधन हैं। पेट्रोल विभिन्न हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है, जबकि एथेनॉल (C₂H₂OH) एक अल्कोहल आधारित ईंधन है। प्रति लीटर एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम ऊर्जा होनी है, इसलिए एथेनॉल मिश्रित ईंधन से माइलेज प्रभावित होने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देते समय यह कहा गया था कि इससे ईंधन सस्ता होगा और उसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। किंतु आज एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भी लगभग उसी मूल्य पर उपलब्ध है. जिस मूल्य पर सामान्य पेट्रोल मिलता था। यदि एथेनॉल मिश्रण से लागत कम हुई है, तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुँचा?
राय ने पत्र में लिखा है कि भारत में एथेनॉल मुख्यतः गन्ने के उत्पादों तथा अब तेजी से बढ़ते मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जा रहा है। इन फसलों के उत्पादन और एथेनॉल निर्माण में भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में, जब देश के अनेक राज्य जल संकट से जूझ रहे हैं और करोड़ों नागरिकों को पर्याप्त स्वच्छ पेयजल भी उपलब्ध नहीं है, तब एथेनॉल नीति के भूजल, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव का स्पष्ट आकलन अनिवार्य है। इससे जल संकट, मक्का और खाद्य सुरक्षा का प्रश्न उत्पन्न हो गया है।
यदि भविष्य में एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर मक्का की आवश्यकता होगी. तो क्या भारत को विदेशी मक्का आयात करना पड़ेगा? यदि ऐसा होता है, तो क्या विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने का उद्देश्य विदेशी कृषि उत्पादों पर निर्भरता में परिवर्तित नहीं हो जाएगा?
राय ने पत्र में लिखा है कि लोकतंत्र में केवल निष्पक्ष निर्णय लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निर्णय निष्पक्ष दिखाई भी देना चाहिए। नीति-निर्माण में पारदर्शिता और जनता का विश्वास स्थापित होना चाहिए। उपरोक्त परिस्थितियों में यह आवश्यक हो गया है कि E20, E85 एवं E100 सहित संपूर्ण एथेनॉल नीति की स्वतंत्र वैज्ञानिक, तकनीकी, आर्थिक एवं पर्यावरणीय समीक्षा कराई जाए। एथेनॉल मिश्रण के लाभ-हानि, जल उपयोग, खाद्य सुरक्षा, इंजन की अनुकूलता, माइलेज तथा उपभोक्ताओं पर आर्थिक प्रभाव से संबंधित सभी अध्ययन सार्वजनिक किए जाएँ। जब तक अधिकांश वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण के लिए पूर्णतः उपयुक्त सिद्ध न हों, तब तक सामान्य पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल-दोनों विकल्प नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएँ। एथेनॉल नीति से जुड़े संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) के प्रश्नों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा भविष्य की ईंधन नीति का दीर्घकालिक रोडमैप सार्वजनिक किया जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन को पूर्णतः सुरक्षित मानती है, तो इंजन को होने वाली किसी भी प्रमाणित क्षति की भरपाई का उत्तरदायित्व वाहन निर्माता, तेल कंपनियों अथवा बीमा कंपनियों का स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए, जिससे उसका पूरा आर्थिक जोखिम देश के उपभोक्ताओं पर न पड़े।