अतिवर्षा से फसलों एवं पशुधन पर प्रभाव का निरीक्षण करने गांव-गांव पहुंचे दीनदयाल शोध संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : क्षेत्र में हुई अतिवर्षा के बाद दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, गनिवां, चित्रकूट के वैज्ञानिकों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा प्रभावित गांवों का भ्रमण कर फसलों एवं पशुधन पर अतिवर्षा के प्रभाव का जमीनी निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान टीम ने गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क किया तथा खेतों एवं पशुओं की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन कर अतिवर्षा से हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की।

दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन द्वारा संस्थान के कोर ग्रुप के साथ आभासी माध्यम से बैठक में निर्देशित किया कि वर्षा से प्रभावित सभी गांवों में संस्थान के कार्यकर्ता अपनी पहुंच बनाएं और कृषि, पशुधन और अन्य आवश्यक विंदुओं पर जिन पर सहयोग संभव हो करने का अधिकतम प्रयास करें। इस दौरान संस्थान के सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, प्रधान सचिव निखिल मुंडले, उपाध्यक्ष अतुल जैन, कोषाध्यक्ष वसंत पंडित, सीईओ अमिताभ वशिष्ठ, महाप्रबंधक डॉ अनिल जायसवाल एवं केवीके प्रमुख उपस्थित रहे।

ग्राम संपर्क में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी के साथ वैज्ञानिक पुष्पेन्द्र सिंह दीक्षित एवं रोहित कुमार मिश्रा तथा कार्यकर्ता अभय कुमार एवं सुरेश ने ग्राम बघौड़ा, बसिला, भौरी, तौरा, नांदी, खरसेड़ा सहित प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान किसानों से अतिवर्षा के कारण फसलों को हुए नुकसान, जलभराव तथा अन्य कृषि संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई।

जमीनी निरीक्षण एवं किसानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अतिवर्षा से दलहनी फसलों में अरहर एवं मूंग तथा तिलहनी फसल तिल को विशेष रूप से नुकसान हुआ है। कई खेतों में अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव के कारण फसलों की वृद्धि एवं उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति पाई गई। वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार फसल प्रबंधन एवं आगे की कृषि कार्ययोजना के संबंध में आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए।

भ्रमण के दौरान पशुधन की स्थिति का भी जायजा लिया गया। निरीक्षण में कुछ पशुओं में खुरपका-मुंहपका एवं लम्पी स्किन डिजीज के प्रकोप के लक्षण देखने को मिले। पशुओं में रोग की स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा पशुपालन विभाग से संपर्क किया गया, ताकि प्रभावित पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार एवं आवश्यक टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

इसी क्रम में दिनांक 2 सितंबर को ग्राम तौरा में पशुपालन शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ पशुपालकों को पशु रोगों की रोकथाम, पशु स्वास्थ्य एवं उचित पशुपालन प्रबंधन के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी तथा विभागीय स्तर पर उपलब्ध आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

कृषि विज्ञान केंद्र की टीम द्वारा अतिवर्षा से प्रभावित गांवों में लगातार भ्रमण कर फसलों एवं पशुधन को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। साथ ही किसानों को अतिवर्षा के बाद फसल प्रबंधन, जल निकासी, आगामी फसल की योजना तथा पशुधन के स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण के संबंध में वैज्ञानिक सलाह प्रदान की जा रही है।

कृषि वैज्ञानिकों ने भौंरी क्षेत्र के आसपास के विभिन्न गांवों का भ्रमण कर किसानों के खेतों में लगी तिल की फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने फसल की स्थिति का जायजा लेते हुए किसानों को तिल की फसल में की जाने वाली प्रमुख सस्य क्रियाओं एवं रोग-कीट प्रबंधन की जानकारी दी।

निरीक्षण के दौरान कुछ खेतों में फाइलोडी रोग, पत्ती धब्बा रोग तथा हेयरी कैटरपिलर (बालदार सूंडी) का प्रकोप पाया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को रोग एवं कीट की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय पर नियंत्रण करने की सलाह दी।

यह ग्राम भ्रमण एवं जमीनी आकलन कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र, गनिवां, चित्रकूट द्वारा किसानों की वर्तमान समस्याओं को समझने एवं उन्हें समय पर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में किया गया महत्वपूर्ण प्रयास है।

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