पोर्टरों की अधिक वसूली पर उत्तर रेलवे की डिकॉय जांच का प्रहार : दोषी पोर्टरों पर होगी सख्त कार्यवाही

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : यात्रियों को निर्धारित टैरिफ के अनुसार ही पोर्टर सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर रेलवे ने लाइसेंसधारी पोर्टरों के विरुद्ध औचक एवं डिकॉय जांच अभियान तेज कर दिया है। इस अभियान के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यात्रियों से किसी भी प्रकार की मनमानी अथवा निर्धारित दर से अधिक वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाल के दिनों में नई दिल्ली, दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन एवं आनंद विहार टर्मिनल पर की गई विशेष जांच के दौरान कई लाइसेंसधारी पोर्टर निर्धारित टैरिफ से काफी अधिक राशि मांगते एवं स्वीकार करते पाए गए।

इस अभियान के दौरान कुल 13 पोर्टर मामलों का पता चला, जो निर्धारित दरों के अनुपालन और निरंतर निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

रंगे हाथों पकड़ी गई अधिक वसूली

आनंद विहार टर्मिनल पर एक लाइसेंसधारी पोर्टर को यात्री से अधिक राशि वसूलते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पोर्टर ने पहले ₹ 800 की मांग की, बाद में ₹ 500 में सौदा तय किया और ₹ 500 स्वीकार किए, जबकि वास्तविक निर्धारित शुल्क मात्र ₹ 230 था।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 20 किलोग्राम सामान के लिए ₹ 300 और ₹ 250 वसूलने के मामले सामने आए, जबकि निर्धारित शुल्क ₹ 140 था।

दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पांच पोर्टर दो सामानों के लिए निर्धारित ₹ 280 से अधिक राशि वसूलते पाए गए। इन मामलों में ₹ 300 से ₹ 500 तक की राशि ली गई।

हजरत निजामुद्दीन पर भी अधिक वसूली के कई मामले सामने आए। कुछ मामलों में पोर्टरों द्वारा यात्रियों से मनमानी राशि पर सौदेबाजी करने तथा UPI/QR आधारित डिजिटल भुगतान लेने के प्रमाण मिले। एक मामले में पोर्टर के पास पहचान-पत्र नहीं पाया गया, जबकि एक अन्य ने अपनी पहचान बताने से इनकार किया।

बैच/बैज होंगे जब्त – जीरो टॉलरेंस

मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पोर्टरों के बैच/बैज को तत्काल जब्त/ड्यूटी से हटाकर अग्रिम आदेश तक रोकने की कार्रवाई प्रस्तावित है। इसके साथ ही लागू नियमों एवं लाइसेंस शर्तों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि अधिक वसूली के विरुद्ध मजबूत निवारक प्रभाव पैदा करना और यात्रियों के हितों की रक्षा करना है।

यात्रियों में बढ़ा भरोसा

इन औचक एवं डिकॉय जांचों का सकारात्मक प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। यात्रियों एवं आम जनता ने जांच टीमों की सक्रियता तथा दोषी पोर्टरों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। इससे यात्रियों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि निर्धारित दर से अधिक वसूली की शिकायतों को रेलवे प्रशासन गंभीरता से ले रहा है।

रेलवे का यात्रियों के लिए स्पष्ट संदेश है:

«“केवल निर्धारित टैरिफ का भुगतान करें – अधिक वसूली की शिकायत तुरंत करें।”»

सम्पूर्ण उत्तर रेलवे में चलेगा डिकॉय जांच अभियान

यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है। उत्तर रेलवे के सभी मंडलों एवं प्रमुख स्टेशनों पर औचक एवं डिकॉय जांच का यह अभियान व्यापक रूप से चलाया जाएगा।

रैंडम डिकॉय ऑपरेशन, औचक निरीक्षण तथा यात्रियों की शिकायतों के सत्यापन के माध्यम से पोर्टरों की कार्यप्रणाली पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी और निर्धारित टैरिफ अथवा लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर रेलवे पोर्टर सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और पूर्णतः यात्री-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

रेल मदद शिकायतें
पोर्टरों द्वारा अधिक वसूली या दुर्व्यवहार की स्थिति में यात्री रेल मदद पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिसमें स्टेशन, पोर्टर का बैज/बैच नंबर एवं संबंधित विवरण दिया जा सकता है। उत्तर रेलवे रेल मदद शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

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