उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने लखनऊ पहुंची हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति

अशोक यादव, लखनऊ : उत्तर प्रदेश की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी अवस्थापना सुविधाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का अध्ययन करने के लिए हरियाणा विधानसभा की उच्चस्तरीय समिति सोमवार को लखनऊ पहुंची। समिति ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विधानसभा सभागार में बैठक कर उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। समिति में हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति के चेयरपर्सन लक्ष्मण सिंह यादव सहित अन्य सदस्यगण शामिल रहे।

बैठक में अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के द्वारा उत्तर प्रदेश की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न आयामों, विद्यालयी अवस्थापना के सुदृढ़ीकरण, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल एवं स्मार्ट शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, व्यावसायिक शिक्षा, निगरानी एवं जवाबदेही की डिजिटल व्यवस्था तथा विभिन्न अभिनव योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया। हरियाणा विधानसभा की समिति के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और प्रदेश के मॉडल को उपयोगी एवं अनुकरणीय बताया।

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। ऑपरेशन विद्यालय कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित और बाल हितैषी वातावरण तैयार किया गया है। वर्ष 2017-18 के बाद विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विभिन्न मानकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका शौचालय, रनिंग वाटर, हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा-कक्षों में टाइल्स, विद्युतीकरण, रैंप एवं रेलिंग, भवनों की रंगाई-पुताई, रसोईघर, बाउंड्रीवाल तथा अन्य सुविधाओं में व्यापक स्तर पर संतृप्ति हासिल की गई है।

प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जिला खनिज निधि, मनरेगा, विकास प्राधिकरण, कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व और सामुदायिक सहभागिता जैसे विभिन्न स्रोतों के माध्यम से विद्यालयों की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत किया गया। प्रदेश में 1.33 लाख विद्यालयों में 19 मूलभूत बाल हितैषी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।

समिति को मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में दो विद्यालयों की स्थापना का प्रावधान है। कुल 150 विद्यालयों को विकसित किए जाने की योजना है, जिसके लिए 4,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक की शिक्षा, ड्रीम लैब, कंप्यूटर एवं लैंग्वेज लैब, स्मार्ट क्लास, रोबोटिक्स एवं मशीन लर्निंग, विज्ञान-गणित प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, मिनी स्टेडियम, ओपन जिम, सोलर पैनल, वर्षाजल संचयन, आरओ एवं यूवी वाटर प्लांट, आधुनिक अग्निशमन व्यवस्था तथा ऑनलाइन सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों के उच्चीकरण की योजना के अंतर्गत 75 विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान, गणित, रोबोटिक्स एवं मशीन लर्निंग की मॉड्यूलर लैब, बाल वाटिका, पोषण वाटिका, वाई-फाई, सीसीटीवी निगरानी, बाल सुलभ फर्नीचर तथा अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षित पेयजल, शौचालय, प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, सोलर पैनल, सीसीटीवी कैमरा, वाई-फाई, खेल मैदान, मल्टीपरपज हॉल, वर्षाजल संचयन, विद्युत व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में मल्टीपरपज हॉल, प्रयोगशालाओं, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, चहारदीवारी, खेल मैदान, स्वच्छ पेयजल और पृथक शौचालय जैसी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है।

बैठक में बताया गया कि विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न शैक्षिक संकेतकों में भी सकारात्मक सुधार हुआ है। माध्यमिक स्तर पर रिटेंशन रेट, सकल नामांकन अनुपात और उच्च माध्यमिक स्तर पर संक्रमण दर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य रही है। नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के लिए विद्यालयों की स्थापना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण, मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय, गैर-शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखंडों में आवासीय बालिका विद्यालय तथा प्रोजेक्ट अलंकार जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण, प्रभावी शिक्षक संकुल बैठकें, अकादमिक कैलेंडर, दैनिक पाठ योजना, प्रिंट-समृद्ध शिक्षण सामग्री, दक्षता आधारित आकलन, कैच-अप शिक्षण, सक्रिय पुस्तकालय एवं रीडिंग कॉर्नर, समाचार-पत्र पठन तथा लेखन दक्षता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन दक्षता आधारित मूल्यांकन और HPC के माध्यम से किया जा रहा है।

शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए राज्य, जनपद और विकासखंड स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था संचालित है। DIKSHA पर 16,000 से अधिक डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध हैं। शिक्षकों को डिजिटल साक्षरता, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईआईटी लखनऊ, आईआईटी कानपुर और आईआईएम अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से भी शिक्षकों एवं शैक्षिक अधिकारियों का क्षमता विकास किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक क्षमता निर्माण के लिए डायट संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 13 डायट संस्थानों के लिए 103 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि दूसरे चरण में 14 डायट संस्थानों के विकास के लिए लगभग 198 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है।

बैठक में डिजिटल और स्मार्ट शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया गया। प्रदेश में 37,266 प्राथमिक एवं 3,775 माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध है। 33,800 प्राथमिक और 3,307 माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित हैं। विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है और स्मार्ट क्लास के माध्यम से नियमित रूप से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से संवाद किया जा रहा है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के तहत बालवाटिका को आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान की मजबूत नींव के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में 71,877 विद्यालयों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें लगभग 38 लाख बच्चे नामांकित हैं। बालवाटिका को शैक्षिक सामग्री, आकलन व्यवस्था, खेल आधारित गतिविधियों और शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। बालवाटिका से कक्षा-1 में सुगम संक्रमण के लिए दो चरणों में स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

समिति को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ प्री-स्किलिंग कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी गई। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए वर्कशॉप एवं इंजीनियरिंग, ऊर्जा एवं पर्यावरण, कृषि-उद्यान एवं नर्सरी तथा होम एवं हेल्थ केयर जैसे ट्रेड शामिल किए गए हैं। वर्तमान में 5,562 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय इस कार्यक्रम से आच्छादित हैं, जिसे चरणबद्ध तरीके से सभी उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों तक विस्तारित किया जाना है।

माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में 506 लैब स्थापित किए जाने की कार्रवाई चल रही है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत 1,701 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और लगभग 1.35 लाख विद्यार्थी इससे आच्छादित हैं। इसके अतिरिक्त 16 ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं।

बैठक में ड्रीम लैब योजना को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। उद्योग समूहों के सहयोग से माध्यमिक विद्यालयों में डिजाइन इनोवेशन, कंप्यूटर एडेड मशीनिंग, एआर-वीआर एवं इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईआईओटी, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ड्रोन, ऑटोमोबाइल एवं बैटरी ईवी जैसे आधुनिक विषयों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक मंडल में विद्यालयों को हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से जोड़ा जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही के लिए विद्या समीक्षा केंद्र तथा विभिन्न डिजिटल एप्लीकेशन और डैशबोर्ड का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासनिक एवं अकादमिक संकेतकों के आधार पर विद्यालयों की निगरानी की जा रही है। निरीक्षण व्यवस्था, शिक्षक एवं छात्र उपस्थिति, विद्यार्थी सीखने के परिणाम, DIKSHA, मानव संपदा और UDISE जैसे डिजिटल स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रभावी अनुश्रवण किया जा रहा है।

बैठक में मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से लगभग 5.96 लाख शिक्षकों एवं कर्मचारियों का डेटाबेस तैयार किए जाने, सेवा पुस्तिकाओं के रखरखाव, वेतन एवं अन्य देयकों के ऑनलाइन भुगतान तथा विभिन्न मानव संसाधन सेवाओं को डिजिटल किए जाने की जानकारी भी दी गई।

समिति को ‘निपुण भारत मिशन’ के विस्तार, पठन संस्कृति एवं समाचार-पत्र पठन अभियान, बाल मेलों, रचनात्मक गतिविधियों, ‘एक कस्तूरबा एक खेल’ पहल, गैर-ईबीबी ब्लॉकों में आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना, शोध एवं नवाचार तथा ‘उद्गम’ जैसे प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी गई। शिक्षा क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा शैक्षिक नवाचारों को साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने उत्तर प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में अवस्थापना विकास, डिजिटल तकनीक के उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा, निगरानी व्यवस्था तथा शैक्षिक नवाचारों की सराहना की। समिति के सदस्यों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधार और नवाचार अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी अनुभव प्रदान करते हैं।

योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवस्थापना, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास, शिक्षक क्षमता निर्माण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ा गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण, समान और आधुनिक शिक्षा का अवसर मिले तथा उत्तर प्रदेश ज्ञान, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बने।

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