महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बीबीएयू में मंथन, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बताया विकास की कुंजी

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार 24 अगस्त को इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन और सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप के संयुक्त तत्वावधान में ‘महिला उद्यमिता (Women Enterpreneurship)’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो. सुनीता मिश्रा मौजूद रहीं। साथ ही पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल की प्रो. शैलजा दीक्षित ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में जुड़ी। इसके अतिरिक्त मंच पर इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, बीबीएयू के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा एवं डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन की विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह मौजूद रहीं। प्रो. नीतू सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।

मुख्य वक्ता प्रो. सुनीता मिश्रा ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की आवश्यकता एवं उन्हें प्राप्त करने के प्रभावी तरीकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि SDGs को स्थानीय स्तर पर अपनाकर सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बदलती जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी स्वस्थ एवं पौष्टिक आहार के प्रति अधिक जागरूक हो रही है और मिलेट्स, माइक्रोग्रीन्स जैसे पोषक खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर रही है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि स्वस्थ खान-पान की बढ़ती मांग के साथ मिलेट आधारित खाद्य एवं बेकरी उत्पादों से जुड़े नए उद्यम भी तेजी से उभर रहे हैं। इन क्षेत्रों को महिला उद्यमिता से जोड़कर महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं मिलेट आधारित उत्पाद, हेल्दी बेकरी प्रोडक्ट्स और माइक्रोग्रीन्स जैसे क्षेत्रों में उद्यम स्थापित कर न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल की प्रो. शैलजा दीक्षित ने उद्यमिता को केवल व्यवसाय तक सीमित न मानते हुए इसे एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल बताया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता व्यक्ति में पहल करने, समस्याओं का समाधान खोजने, नवाचार करने, संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने, निर्णय लेने, वित्तीय समझ विकसित करने, आत्मविश्वास और जोखिम उठाने जैसी क्षमताओं का विकास करती है। प्रो. दीक्षित ने बताया कि आज के समय में व्यवसाय एवं उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद आवश्यक है। महिलाओं में मौजूद रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और नए अवसरों को पहचानने की क्षमता को उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी, बल्कि नए विचारों और नवाचारों के माध्यम से समाज एवं अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं की उद्यमिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है। उन्होंने किरण मजूमदार-शॉ जैसी सफल महिला उद्यमी तथा नायका(Naykaa) जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि महिलाओं ने अपने नवाचार, नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प और व्यावसायिक कौशल के माध्यम से उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ की गई सेक्शन-8 कंपनी ‘नवकल्पना’ का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में नवाचार एवं उद्यमशीलता की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां बड़ी संख्या में महिलाएं गृह उद्योग, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों तथा छोटे व्यवसायों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विभागीय स्तर पर शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ नियमित रूप से ब्रेनस्टॉर्मिंग गतिविधियां करनी चाहिए, ताकि उनमें नए विचारों, नवाचार, समस्या-समाधान और उद्यमिता की सोच विकसित हो सकें।

अंत में आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह देकर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही डॉ. माधवी डेनियल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

समस्त कार्यक्रम के दौरान प्रो. शालिनी अग्रवाल, प्रो. शूरा दारापुरी, डॉ. प्रियंका शंकर, अन्य शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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