
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : प्रयागराज : उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार सर्किट हाउस, प्रयागराज में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बाढ़ एवं आपदा की स्थिति की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, एसडीआरएफ (SDRF), जल पुलिस के अधिकारी, अपर जिलाधिकारी सहित समस्त उपजिलाधिकारी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री जी ने जनपद में बाढ़ एवं जलभराव की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्य, जल निकासी, राहत शिविरों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता की बिंदुवार समीक्षा की।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। जहां भी अधिकारियों की लापरवाही अथवा समय पर कार्रवाई न करने के कारण जलभराव अथवा नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा है, वहां जांच कराकर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन का उद्देश्य केवल वर्तमान स्थिति से निपटना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकना भी होना चाहिए।
मौर्य ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर बार-बार जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है, उन्हें तत्काल चिन्हित किया जाए तथा वहां स्थायी एवं प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नालों, सीवर लाइनों और जल निकासी मार्गों की नियमित सफाई कराई जाए, ताकि बरसात के दौरान पानी की निकासी बाधित न हो। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले स्थानों पर अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करें और किसी भी समस्या की जानकारी मिलते ही तत्काल उसका समाधान कराएं।

उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में पानी निकलने के बाद यदि वहां गंदगी, कीचड़ और कूड़े का अंबार लगा हो तो सफाई एवं सैनिटाइजेशन की विशेष व्यवस्था तत्काल कराई जाए। प्रभावित क्षेत्रों में सफाईकर्मियों की पर्याप्त संख्या में तैनाती कराकर कीटनाशक एवं आवश्यक दवाओं का छिड़काव कराया जाए, ताकि जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका को रोका जा सके।
उपमुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रभावित हर परिवार तक समय से भोजन, राशन, पेयजल, कपड़े, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। राहत सामग्री वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता अथवा भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत कार्यों में मानवीय संवेदना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहने पाए।
उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में लगे एसडीआरएफ, जल पुलिस और अन्य संबंधित टीमों को पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, आवश्यकतानुसार नावों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि 24 घंटे सतर्क रहते हुए स्थिति पर नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करें।
मौर्य ने राहत शिविरों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक राहत शिविर में मेडिकल कैंप स्थापित कर डॉक्टरों की टीमें, आवश्यक दवाइयां और प्राथमिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल, भोजन, शौचालय, बिजली तथा साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व, स्वास्थ्य, नगर निकाय, ग्राम्य विकास, पुलिस, जल पुलिस, एसडीआरएफ सहित सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। राहत एवं बचाव कार्यों में विभागीय समन्वय की कमी किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक अधिकारी को अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभानी होगी और फील्ड में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान करना होगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ आपदा की स्थिति में सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, समयबद्ध राहत और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक मशीनरी का दायित्व है कि संकट की घड़ी में जनता को यह महसूस हो कि सरकार और प्रशासन पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान बाढ़ की स्थिति से सबक लेते हुए भविष्य के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती है, वहां उसके मूल कारणों का तकनीकी परीक्षण कराकर स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाए। नालों एवं जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और मानसून से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
मौर्य ने अंत में कहा कि आपदा के समय लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। अधिकारी पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें। राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार को समय पर राहत मिले, प्रत्येक जरूरतमंद तक सहायता पहुंचे और जनहानि को हर संभव प्रयास से रोका जाए।