हरित भारत की दिशा में बीबीएयू की पहल, कुलपति ने वृक्षारोपण कर, मालियों का सम्मान किया

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 5 अगस्त को बागवानी एवं सौंदर्यीकरण अनुभाग की ओर से बिरसा मुंडा छात्र गतिविधि केंद्र के परिसर में वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मुख्य तौर पर बीबीएयू सलाहकार प्रो. के.के. पाण्डेय, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा एवं बागवानी एवं सौंदर्यीकरण अनुभाग के अध्यक्ष प्रो. जी.सी. यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों साथ मिलकर पौधें लगायें। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति और मानव का संबंध एक-दूसरे का पूरक है। यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण देना है, तो वृक्षारोपण को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न मानकर जनआंदोलन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसके संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि वृक्ष हमें केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन, जलवायु संतुलन और पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।‌ प्रो.‌मित्तल ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह प्रकृति के संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे। साथ ही उन्होंने सभी से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है और एक हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-संतुलित भारत ही विकसित भारत की सशक्त आधारशिला बनेगा।इस अवसर पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विश्वविद्यालय परिसर को हरित एवं स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले मालियों को भी सम्मानित किया।समस्त कार्यक्रम के दौरान हार्टिकल्चर इंस्पेक्टर डॉ. समीर दीक्षित, डॉ. मनोज कुमार डडवाल, डॉ. रवि शंकर वर्मा, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, माली एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button