
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : लखनऊ की आन्या सिंह ने अपनी शोधपरक लेखनी के माध्यम से परिवार की पांच पीढ़ियों के इतिहास, संघर्षों और उपलब्धियों को शब्दों में संजोकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्हें किश्वर मेमोरियल ट्रस्ट और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस की ओर से आयोजित अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आन्या को यह सम्मान उनके निबंध ‘थ्रू द हैंड्स ऑफ टाइम—ओरल हिस्ट्री ऑफ माय फैमिली’ के लिए मिला है, जिसका हिंदी अर्थ है—‘समय के हाथों से—मेरे परिवार का मौखिक इतिहास’।
आन्या ने अपने 12,200 शब्दों के निबंध में अपने ननिहाल और पैतृक परिवार की पांच पीढ़ियों की जीवन यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। इसमें पूर्वजों के संघर्ष, पारिवारिक परंपराओं, उपलब्धियों तथा बदलते समय के साथ आए सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। उनके पैतृक परिवार की जड़ें जौनपुर जिले के तिरकौली गांव में हैं, जबकि ननिहाल का संबंध शाहगंज से है। आन्या ने दोनों परिवारों की स्मृतियों, अनुभवों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित परंपराओं के माध्यम से इतिहास को समझने का प्रयास किया है।
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य लोगों को अपने परिवार, गांव, कस्बे और शहर के इतिहास का शोधपरक दस्तावेजीकरण करने के लिए प्रेरित करना है। इसके माध्यम से मौखिक इतिहास, पारिवारिक अभिलेखों, वंशावलियों और पुरानी परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया जाता है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, विद्वानों के साथ ऐसे लोगों को भी भाग लेने का अवसर दिया गया, जिनके पास औपचारिक शैक्षणिक डिग्री नहीं है, लेकिन पारिवारिक इतिहास और वंशावली का पारंपरिक ज्ञान है।
प्रतियोगिता में भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में निबंध आमंत्रित किए गए थे। प्रविष्टियों के लिए न्यूनतम शब्द सीमा 5,000 शब्द निर्धारित की गई थी, जबकि अधिकतम सीमा तय नहीं थी। ट्रस्ट की ओर से 11 हजार रुपये से लेकर एक लाख एक हजार रुपये तक के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। इसे वार्षिक प्रतियोगिता के रूप में आयोजित करने की योजना है।
निर्णायक मंडल में मिरांडा हाउस की प्राचार्य प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन. मिश्रा, इंडिका के निदेशक डॉ. नागराज पाटुरी, भारतीय विज्ञान संस्थान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर के. गोपीनाथ और ‘मनुषी’ की संस्थापक मधु किश्वर शामिल थीं। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार साझा करने वाले अन्य दो विजेताओं में डॉ. शुद्धतम प्रकाश जैन और तन्वी शाह भी शामिल हैं।
डॉ. अमित कुमार सिंह और मिली सिंह की पुत्री आन्या की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है। उनके दादा सत्य नारायण सिंह और नाना विनोद कुमार सिंह ने भी उनकी सफलता पर प्रसन्नता जताई है। आन्या की यह उपलब्धि बताती है कि परिवारों की निजी स्मृतियां और पूर्वजों के अनुभव भी इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उनके लेखन ने तिरकौली और शाहगंज से जुड़ी पारिवारिक जड़ों को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया है।
