बीबीएयू में पंचकोश आधारित शिक्षा पद्धति पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न; पूर्व कुलपति बोले – मन के जीते जीत है

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित ‘पंचकोश आधारित शिक्षा पद्धति: प्रासंगिकता, चुनौतियां एवं कार्यान्वयन’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन हुआ। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के कुशल दिशानिर्देशन एवं संरक्षण में योग विभाग तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में मुस्तैदी से आयोजित किया गया।

वास्तविक शिक्षा वही, जो आत्मबोध से परमार्थ की ओर ले जाए: प्रो. अनिल कुमार शुक्ला
समापन सत्र के मुख्य अतिथि, तीन विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपति प्रो. अनिल कुमार शुक्ला ने पंचकोश के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।” उन्होंने मनुस्मृति के श्लोकों का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा का अंतिम ध्येय प्रज्ञा चक्षु का विकास कर व्यक्ति को परमार्थ और समाज कल्याण की ओर प्रेरित करना है। स्कूल ऑफ योगा के संकायाध्यक्ष प्रो. बी.सी. यादव ने इस पद्धति को आधुनिक शिक्षा नीति से जोड़ने तथा योग विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने इसे शोधार्थियों के आत्मचिंतन के लिए एक युगांतकारी विधिक माध्यम बताया। मंच संचालन डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने किया।

अन्नमय से आनंदमय कोश तक के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर पैनल चर्चा
तकनीकी सत्र के दौरान योग विभाग की शोधार्थी डॉली आर्या ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश की अवधारणा सहित त्रिदोष, सप्तधातु व जल चेतना (Water Consciousness) पर वैज्ञानिक प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, प्रो. पी.के. चौरसिया की अध्यक्षता में ‘विज्ञानमय कोश’ तथा सीसीएसयू के प्रो. बी.सी. यादव के मार्गदर्शन में ‘आनंदमय कोश एवं चरित्र निर्माण’ विषय पर विशेष व्याख्यान व मूल्यांकन मॉडल हेतु पैनल चर्चा संपन्न हुई। कार्यक्रम के सफल समापन पर संयोजक डॉ. नरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जिसमें भारी संख्या में शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित रहे।

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