
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, भोपाल : रात के शांत वातावरण में हाईवे पर सफर करना जितना सुगम लगता है, तनिक भी लापरवाही बरतने पर उतना ही जोखिम भरा साबित हो सकता है. घने अँधेरे में दृश्यता घटने और थकान बढ़ने के कारण ड्राइवरों की एक छोटी सी चूक भी जानलेवा हादसे में बदल सकती है. इसी संवेदनशीलता को देखते हुए, यातायात प्रहरियों ने देवास भोपाल हाईवे जैसे आधुनिक कॉरिडोर और देश के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करने हेतु 7 अति-महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका अक्षरों में पालन करना प्रत्येक चालक की विधिक व नैतिक जिम्मेदारी है.

दृश्यता, नियंत्रित रफ्तार और हेडलाइट के सही उपयोग की सख्त हिदायत
सुरक्षित यात्रा आख्या के अनुसार, ड्राइवरों को अपनी गाड़ी की रफ्तार हमेशा हेडलाइट की रोशनी की विधिक सीमा के भीतर ही रखनी चाहिए, ताकि मोड़ या गड्ढा आने पर वाहन को मुस्तैदी से रोका जा सके. खाली सड़कों पर तेज गति से दौड़ने के बजाय निर्धारित गति सीमा का कड़ाई से पालन करें. सामने से आते हुए वाहनों को देखकर अपनी हेडलाइट को हाई बीम से तत्काल लो बीम पर लाएं, ताकि दूसरे ड्राइवर की आँखें चौंधियाएं नहीं. इसके अतिरिक्त, बार-बार लेन बदलने से बचें; धीमे वाहनों को हमेशा बाईं लेन में ही चलाएं तथा मुड़ने या ओवरटेक करने से पूर्व इंडिकेटर देना विधिक रूप से सुनिश्चित करें.

थकान होने पर ब्रेक लें और सड़क के बजाय किनारे पर पार्क करें गाड़ी
सुरक्षा कप्तानों के अनुसार, थकी हुई आँखें और भारी पलकें सबसे बड़ी खतरे की घंटी हैं. लंबे सफर के दौरान प्रत्येक 2 घंटे या 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद सुरक्षित स्थानों पर रुककर थोड़ा टहलें और चेहरे पर पानी के छींटे मारें. यदि गाड़ी में कोई यांत्रिक खराबी या पंक्चर होता है, तो उसे हाईवे की मुख्य परिचालन लेन में रोकने के बजाय सड़क से काफी हटकर किनारे पर पार्क करें, हैज़र्ड लाइट चालू करें और वाहन के पीछे रिफ्लेक्टिव ट्रायंगल रखें. सड़क पर लगे रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड और रोड स्टड्स का बारीकी से संज्ञान लें, क्योंकि ये अँधेरे में आपके सबसे भरोसेमंद विधिक साथी हैं.