
अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर क्राइम हेड क्वार्टर की टेक्निकल टीम के संयुक्त सहयोग से एक वृहद् ‘साइबर जागरूकता कार्यक्रम’ का सफल आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल की गरिमामयी अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष विधिक सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा छात्र प्रहरियों को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा संरक्षण और डिजिटल अपराधों से बचाव के प्रति सचेत करना था।

राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल की दी गई लाइव ट्रेनिंग
साइबर क्राइम हेड क्वार्टर के विख्यात विशेषज्ञ मोहसिन खान ने तकनीकी आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, आकर्षक लॉटरी ऑफर और बैंक केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर जाल बिछा रहे हैं। इसी क्रम में, यूपी साइबर सेल के आशीष पाण्डेय एवं रिषभ कौशिक ने वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की विधिक उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि त्वरित सूचना देने से ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ के जरिए ठगी गई राशि को बैंक खातों में ही फ्रीज कराया जा सकता है।

अकादमिक कप्तानों की मौजूदगी में प्रो. मित्तल ने लालच व जल्दबाजी पर नियंत्रण की दी सीख
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में घोषणा की कि बीबीएयू जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार के साइबर सेल के साथ एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित करेगा, ताकि छात्र डिजिटल सुरक्षा में शोध कर सकें। उन्होंने प्रलोभन व जल्दबाजी से बचने की सीख दी। इस अवसर पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, यूआईईटी के निदेशक प्रो. शिशिर कुमार, कार्यक्रम संयोजक प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय तथा डॉ. मंगलदीप गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के सैकड़ों वरिष्ठ शोधार्थी व प्रशासनिक कर्मचारी उपस्थित रहे।

