
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 11 वर्षीय नाजिया की कहानी आज ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा के प्रति एक नई विस्मयकारी उम्मीद जगा रही है। लगातार चार वर्षों तक स्कूल से दूर रहने और पारिवारिक मजबूरियों के कारण घर के काम संभालने वाली इस बच्ची का दाखिला नजदीकी ‘पीएम श्री विद्यालय’ की चौथी कक्षा में मुस्तैदी से कराया गया है।
गरीबी के कारण छूटी थी पढ़ाई, सोशल मैपिंग से बदली तकदीर
नाजिया के पिता नूर मोहम्मद और माँ रहमतून निशा दैनिक मजदूरी कर आठ सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण कक्षा 1 के बाद ही नाजिया को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी और उस पर पानी ढोने व भाई-बहनों की देखरेख का बोझ आ गया था। गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ द्वारा चलाए गए सोशल मैपिंग अभियान के दौरान एक स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से नाजिया के स्कूल न जाने की विधिक जानकारी मिली। संस्था के फील्ड कोऑर्डिनेटर ने परिजनों की कई दौर की काउंसलिंग कर उन्हें बेटी को पढ़ाने के लिए राजी किया।
‘ज्ञान का पिटारा’ और समर कैंप से शिक्षिका बनने का सपना हुआ सच
दाखिले से पहले संस्था द्वारा आयोजित 18-दिवसीय समर कैंप में नाजिया ने शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। एजुकेट गर्ल्स का ‘विद्या’ कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में 7 से 14 साल तक के बच्चों की बुनियादी पढ़ाई को मजबूत करने की एक समुदाय-आधारित पहल है। इसके तहत गाँव के ही प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक, जिन्हें ‘टीम बालिका’ कहा जाता है, संस्था के विशेष पाठ्यक्रम ‘ज्ञान का पिटारा’ के माध्यम से बच्चों के हिंदी, अंग्रेजी और गणित के बुनियादी कौशल को बेहतर करते हैं। अब नियमित स्कूल जा रही नाजिया का सपना पढ़-लिखकर एक कुशल शिक्षिका बनने का है।
