भारतरत्न नानाजी देशमुख के जन्मदिवस पर बाढ़ विभीषिका के बावजूद चित्रकूट में तीन दिवसीय ‘शरदोत्सव’ का होगा आयोजन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : देश-दुनिया को स्वावलम्बन का संदेश देने वाले राष्ट्रऋषि भारतरत्न नानाजी देशमुख के जन्मदिन शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ ‘‘शरदोत्सव’’ का आयोजन पूर्व की भांति पूरी भव्यता के साथ दीनदयाल परिसर में संपन्न होगा। हाल ही में चित्रकूट में आई भीषण बाढ़ विभीषिका के चलते आयोजक मंडल द्वारा इस वर्ष कार्यक्रम को केवल एक दिवसीय करने का विचार किया गया था, परंतु उद्यमिता विद्यापीठ के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में आयोजित एक वृहद् बैठक में संत समाज और नगर वासियों के पुरज़ोर विधिक व नैतिक आग्रह पर इसे पुनः तीन दिवसीय पारंपरिक उत्सव के रूप में आयोजित करने पर सर्वसहमति बनी।

महंत सीताशरण दास और अभय महाजन की मौजूदगी में हुआ नीतिगत निर्णय
सांस्कृतिक संध्या की रूपरेखा तय करने हेतु आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जानकी महल के महंत सीताशरण दास, दिगंबर अनी अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास, करह आश्रम के महंत माधव दास, नागाजी पंजाबी भगवान, टाठी घाट के त्रिवेणी दास तथा गायत्री शक्तिपीठ के डॉ. रामनारायण त्रिपाठी उपस्थित रहे। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन एवं सचिव अपराजित शुक्ल ने स्पष्ट किया कि नानाजी का जीवन सदैव जनमानस के लिए समर्पित रहा है, अतः संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश और जिला प्रशासन के सहयोग से इस राष्ट्रीय स्तर के उत्सव की गरिमा को बरकरार रखा जाएगा।

प्रशासनिक प्रभारियों और जनप्रतिनिधियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
इस विस्मयकारी विमर्श बैठक में ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. आलोक चौबे, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय, सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के डॉ. इलेश जैन, तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा राजस जोहरी, नगर पंचायत अध्यक्ष सुश्री साधना पटेल, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती रूपा अग्रवाल व श्रीमती संगीता जैन शामिल हुईं। प्रशासनिक स्तर से एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर व तहसीलदार कमलेश भदौरिया तथा राजनीतिक व विधिक क्षेत्र से भाजपा जिला अध्यक्ष महेंद्र कोटार्य, पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे, वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्र, अतुल प्रताप सिंह, अश्वनी अवस्थी, राव प्रबल श्रीवास्तव, विवेक अग्रवाल और गुड्डा भैया चतुर्वेदी ने उपस्थित रहकर पारंपरिक नृत्य एवं गायिकी केंद्रित इस आयोजन को सफल बनाने के विधिक सुझाव दिए।

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