उ0प्र0 सरकार का पिछड़े वर्ग की शैक्षिक एवं अन्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर : नरेन्द्र कश्यप

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : प्रदेश के राज्यमंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने सोमवार अपने सरकारी कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि सरकार द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों एवं पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभिन्न जनकल्याणकारी एवं शैक्षिक योजनाओं के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण तथा पात्र परिवारों को शादी अनुदान उपलब्ध कराने के साथ-साथ छात्रावासों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में शादी अनुदान योजना के लिए ₹ 210 करोड़ का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सापेक्ष ₹ 106.65 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। योजना के अंतर्गत अब तक 96,956 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 12,855 आवेदन निरस्त किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 30,466 लाभार्थियों को ₹ 60.93 करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। यह आवंटित धनराशि का लगभग 57.13 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि युवाओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़ने और उनकी रोजगारपरक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹ 40 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

योजना के अंतर्गत ‘ओ’ लेवल एवं सीसीसी प्रशिक्षण के लिए कुल 338 संस्थाओं का चयन किया गया है। निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष ‘ओ‘ लेवल में 24,242 तथा सीसीसी में 7,462, अर्थात कुल 31,704 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दिनांक 11 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है। निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष ‘ओ’ लेवल में 24,240 तथा सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के लिए कुल ₹340 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष शासन स्तर से ₹300 करोड़ की स्वीकृति जारी की गई है। योजना के अंतर्गत लगभग 11 लाख विद्यार्थियों को लाभान्वित किए जाने का प्रस्ताव है। विद्यार्थियों के ऑनलाइन आवेदन तथा भुगतान की प्रक्रिया के लिए विस्तृत समय-सारणी भी निर्धारित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की निर्धारित दरें कक्षा एवं छात्र के निवास के आधार पर अलग-अलग हैं।

छात्रावासी विद्यार्थियों के लिए अधिकतम मासिक दर ₹ 1,200 तथा दिवा विद्यार्थियों के लिए अधिकतम ₹ 550 तक निर्धारित है। इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के लिए ₹ 2,720.50 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष शासन स्तर से ₹ 2,255 करोड़ की स्वीकृति जारी की गई है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 27 लाख विद्यार्थियों को लाभान्वित किए जाने का प्रस्ताव है।

ऑनलाइन आवेदन एवं भुगतान की प्रक्रिया के लिए संबंधित संस्थाओं को मास्टर डेटाबेस में सम्मिलित करने तथा अन्य आवश्यक कार्यवाही के लिए समय-सारणी निर्धारित की गई है। ज्ञातत्व हो कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत लगभग 27.78 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया तथा आवंटित धनराशि का लगभग 98 प्रतिशत व्यय किया गया था।

कश्यप ने बताया कि पिछड़े वर्ग के निर्धन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से उ0प्र0 सरकार द्वारा छात्रावास निर्माण योजना संचालित की जा रही है ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण एवं आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छात्रावास निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 102 निर्मित छात्रावास उपलब्ध हैं, जिनमें लगभग 5,400 विद्यार्थियों के आवास की क्षमता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन छात्रावासों में कुल 2,013 छात्र-छात्राएं आवासित रहे।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में छात्रावास निर्माण के लिए ₹20 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है। आवश्यकता एवं प्राथमिकता के आधार पर जनपदवार छात्रावास निर्माण हेतु स्थलों एवं परियोजनाओं का चयन किया जाएगा। स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूरा कराने तथा निर्माण कार्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने प्रमुख सचिव को निर्देश दिये कि वह समाज कल्याण विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर विभागीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें। मण्डल, ज़िला एवं तहसील स्तर पर कैम्प का आयोजि कर समस्त योजनाओं को प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का सुनिश्चित करे। तकनीक के इस युग में सोशल मीडिया का भरपूर प्रयोग करें तथा इसके लिए एक व्यय अनुपाप का निर्धारण भी करें कि किस मद में कितनी धनराशि प्रयोग की जाए।

बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, निदेशक उमेश प्रताप सिंह, संयुक्त निदेशक विकास शर्मा के अतिरिक्त अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थें।

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