बीबीएयू में विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी संस्कृति, अधिकारों एवं उद्यमिता पर हुआ मंथन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के अवसर पर विशेष व्याख्यान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मुख्य तौर पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शशि कुमार एवं डॉ. सोमीपेम आर. शिमरे उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रख्यात आदिवासी साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य महादेव टोप्पो, दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. आयशा गौतम ओरांव ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए आदिवासी विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिश्रम एवं उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने भीतर आदिवासी उद्यमिता की भावना विकसित करने का आह्वान किया, ताकि स्वदेशी ज्ञान, कौशल एवं संसाधनों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में उनका सक्रिय योगदान सुनिश्चित हो सके। साथ ही प्रो. मित्तल ने बताया कि विश्वविद्यालय आदिवासी समुदाय से जुड़े शोध, अकादमिक अध्ययन एवं ज्ञान परंपराओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रख्यात आदिवासी साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य श्री महादेव टोप्पो ने आदिवासी जीवन, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी अपनी काव्य रचना का पाठ किया, जिसने कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो.एस. विक्टर बाबू ने देश के विकास में आदिवासी समुदाय के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. आयशा गौतम ओरांव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आदिवासी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं एवं अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम संयोजक प्रो. शशि कुमार ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वभर में और विशेष रूप से भारत में आदिवासी समुदाय के मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी प्रस्तुत की गईं, जिनके माध्यम से आदिवासी समुदाय की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं लोक विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. एम.एल. मीणा, सुश्री मंजरी राज ओरांव, अन्य शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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