
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के निर्देश पर परिवहन विभाग द्वारा बिना परमिट या परमिट शर्तों के उल्लंघन को लेकर बरेली संभाग के जनपद बरेली, पीलीभीत, बदायूँ एवं शाहजहाँपुर में अनधिकृत यात्री वाहनों/लंबी दूरी की बसों के बिना परमिट, परमिट की शर्तों के उल्लंघन तथा नियमविरुद्ध संचालित यात्री वाहनों के विरुद्ध विशेष प्रवर्तन अभियान ऑपरेशन प्रहार चलाया गया।
परिवहन विभाग ने अभियान के संचालन हेतु अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन), उत्तर प्रदेश, के. डी. सिंह गौर के नेतृत्व में एक विशेष 08 सदस्यीय प्रवर्तन दल का गठन किया। उक्त विशेष दल द्वारा 22 जुलाई की मध्य रात्रि से 24 जुलाई, 2026 तक जनपद बरेली एवं पीलीभीत में सघन प्रवर्तन अभियान संचालित करके प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई की गई।
समानांतर रूप से उप परिवहन आयुक्त, बरेली परिक्षेत्र, बरेली कमल प्रसाद गुप्ता के निर्देशन में बरेली मंडल के प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा जनपद बदायूँ एवं शाहजहाँपुर में व्यापक प्रवर्तन कार्रवाई की गई।
के0डी0 सिंह ने बताया कि इस संयुक्त अभियान में कुल 81 बसों का चालान किया गया और 59 बसें विभिन्न थानों में निरुद्ध की गई। ष्आपरेशन प्रहारष् के दौरान वाहनों के परमिट, पंजीयन, फिटनेस प्रमाण-पत्र, कर, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र तथा राष्ट्रीय वाहन डाटाबेस (NR Database) सहित समस्त अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। जहाँ कहीं भी मोटरयान अधिनियम, 1988 अथवा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 1998 के प्रावधानों एवं परमिट शर्तों का उल्लंघन पाया गया, वहाँ संबंधित वाहनों के विरुद्ध तत्काल चालान एवं निरुद्धीकरण सहित विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
सिंह ने बताया कि जांच के दौरान अधिकांश वाहन वैध All India Tourist Permit अथवा All U-P- Contract Carriage Permit के अंतर्गत संचालित पाए गए। नियमित स्टेज कैरिज संचालन, विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत, व्यापक राजस्व हानि तथा अन्य प्रकाशित आरोपों के संबंध में उपलब्ध अभिलेखों, स्थलीय निरीक्षण एवं संबंधित विभागों तथा पुलिस से प्राप्त सूचनाओं का परीक्षण किया गया, जिसमें इन आरोपों के समर्थन में कोई अभिलेखीय अथवा तथ्यात्मक साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि वाहनों की संरचना में अनधिकृत परिवर्तन संबंधी शिकायतों के परीक्षण हेतु निरुद्ध वाहनों का कार्यपालक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में तकनीकी परीक्षण कराया जाना प्रस्तावित है। परीक्षण में यदि किसी वाहन में नियमविरुद्ध संरचनात्मक परिवर्तन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध फिटनेस, पंजीयन, परमिट एवं अन्य वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
के0डी0 सिंह ने बताया कि परिवहन मंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि यात्रियों की सुरक्षा, विधिसम्मत परिवहन व्यवस्था एवं शासकीय राजस्व की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखी जायें। भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान निरंतर संचालित किए जायें ताकि सुरक्षित, पारदर्शी एवं विधिसम्मत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
