माँ के नाम खत – ( मम्मी की याद में पत्र ) : सुशी सक्सेना

मेरी प्यारी मम्मी,

आज जब मैं यह पत्र लिखने बैठी हूँ, तो मन भावनाओं से भर उठा है। ऐसा लगता है जैसे तुम आज भी मेरे पास ही हो, मेरे मन के कोने में सदा जीवित हो।

माँ, तुम आज भी ज़िन्दा हो मुझमें कहीं।

माना कि तुम्हें गुजरे हुए एक जमाना हो गया मगर फिर भी तुम्हारी यादों से आज भी मेरे दिल की ज़मीन हरी-भरी है। मुझे अपनी हर अदा में तुम्हारी ही झलक दिखाई देती है और अपनी बातों में तुम्हारी मधुर आवाज की खनक सुनाई देती है। तुमने जो संस्कार, प्रेम और जीवन के मूल्य मुझे दिए, वही आज मेरा सबसे अनमोल खजाना हैं। उन्हीं की रोशनी में मैं संघर्षमय जीवन की राह पर आगे बढ़ रही हूँ। तुम्हारा आशीर्वाद आज भी मेरे साथ है, जो हर कठिन घड़ी में मुझे संभालता है और आगे बढ़ने का साहस देता है। मेरे जीवन के हर छोटे-बड़े निर्णय में तुम्हारा आशीर्वाद और तुम्हारी सीख आज भी मेरे साथ चलती है।

जब भी मैं आईने में खुद को देखती हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी ही तस्वीर सामने हो। मैं हर दिन, हर पल तुमसे मिलती हूँ—अपनी यादों में, अपने सपनों में, अपने एहसासों में। हर रात मैं तुम्हारे आँचल की छाँव ढूँढती हूँ। तुम्हारे हाथों की वह गर्माहट आज भी अपने दिल में महसूस करती हूँ। हर पल ऐसा लगता है जैसे तुम मेरे साथ एक साये की तरह चल रही हों, मुझे संभाल रही हों, मेरा हौसला बढ़ा रही हों। मैं आज भी तुमसे जुड़ी हुई हूँ, क्योंकि तुम मेरे दिल, मेरी आत्मा और मेरे अस्तित्व में हमेशा जीवित हैं।

मां तुम आज भी ज़िन्दा हो मुझमें कहीं।

आज भी जब मैं अपनी आँखें बंद करती हूँ, तो तुम्हारा स्नेहमयी चेहरा मेरे सामने आ जाता है। ऐसा लगता है जैसे तुम कहीं गई ही नहीं, बल्कि तुम आज भी जीवित हो और मेरे पास हो। और तुम्हारी यादें मेरे जीवन की सबसे बड़ी अमूल्य निधि है।

माँ, तुम आज भी ज़िन्दा हो मुझमें कहीं।

तुम्हारी यादों में,
तुम्हारी नादान बेटी
सुशी सक्सेना

इंदौर मध्यप्रदेश

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