देवास-भोपाल हाईवे से बढ़ेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था; कुबेरेश्वर धाम और सलकनपुर के पर्यटकों से छोटे व्यवसायों को मिल रही गति

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, भोपाल: किसी भी राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में सुदृढ़ परिवहन और सड़क कनेक्टिविटी की भूमिका सर्वोपरि होती है। मध्य प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्रों को जोड़ने वाला देवास-भोपाल हाईवे वर्तमान में क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, खानपान और सूक्ष्म व्यवसायों के लिए संभावनाओं का एक विस्मयकारी विधिक कॉरिडोर बनकर उभरा है। इस मार्ग पर बढ़ने वाली दैनिक व व्यावसायिक आवाजाही से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिल रहा है।

धार्मिक पर्यटन से बढ़ा व्यापार; कुबेरेश्वर धाम और सलकनपुर के यात्रियों का सहारा
इस हाईवे की सबसे बड़ी यूएसपी इसके समीप स्थित विख्यात धार्मिक और पर्यटन केंद्र हैं। कुबेरेश्वर धाम तथा सलकनपुर जैसे आस्था के बड़े केंद्रों की ओर जाने वाले लाखों श्रद्धालु व पर्यटक इसी मार्ग का विधिक उपयोग करते हैं। सुगम आवागमन के फलस्वरूप रास्ते में पड़ने वाले पारंपरिक ढाबों, भोजनालयों, छोटे होटलों, वाहन मरम्मत केंद्रों (गैराज) और पेट्रोल पंपों की व्यावसायिक मांग में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय उत्पादों के विपणन हेतु यह हाईवे एक जीवंत खुला बाजार सिद्ध हो रहा है, जिससे ग्रामीण अंचलों के युवाओं को उनके घर के समीप ही रोजगार मिल रहा है।

यात्री सुरक्षा, साफ लेन मार्किंग और आधुनिक हाईवे प्रबंधन पर विशेष ज़ोर
इस आर्थिक तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन का मुस्तैद यातायात प्रबंधन सराहनीय योगदान दे रहा है। सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थित सड़कों, साफ लेन मार्किंग, रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड और चौबीस घंटे उपलब्ध रहने वाली आपातकालीन यात्री सहायता प्रणालियों को धरातल पर उतारा गया है। कप्तानों व प्रबंधकों के अनुसार, जब यात्रियों को सुरक्षित और सुखद यात्रा का अनुभव प्राप्त होता है, तो वे हाईवे के आसपास रुककर समय बिताना पसंद करते हैं। यह व्यवस्थित चक्र अंततः स्थानीय सूक्ष्म अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों को जोड़कर आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के संकल्प को विधिक रूप से गति प्रदान कर रहा है।

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