
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और श्रीरामचन्द्र पथ गमन न्यास के तत्वावधान में मंगलवार की संध्या पर चित्रकूट के पावन राघव प्रयाग घाट पर सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। आगामी 19 अक्टूबर तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में भारत सहित विभिन्न देशों की पारंपरिक कला शैलियों के माध्यम से प्रभु श्रीराम के वैश्विक जीवन-चरित्र और आदर्शों को जीवंत किया जाएगा।
सांसद गणेश सिंह और विधायक सुरेंद्र सिंह ने किया भव्य शुभारंभ
इस गरिमापूर्ण महोत्सव का आधिकारिक शुभारंभ मुख्य अतिथियों— सतना सांसद श्री गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, संतोषी अखाड़ा के महंत रामजी दास जी महाराज तथा कामदगिरी प्रमुख द्वार के महंत मदन दास जी महाराज द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, नगर पंचायत चित्रकूट की अध्यक्ष सुश्री साधना पटेल तथा तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा जौहरी मुस्तैदी से उपस्थित रहीं। सांसद गणेश सिंह ने चित्रकूट को प्रभु राम की तपोभूमि बताते हुए कहा कि उनकी लीलाओं में जीवन का वास्तविक विधिक दर्शन निहित है।

यूनेस्को धरोहर ‘खोन नृत्य’ से जीवंत हुए रामायण के वैश्विक प्रसंग
उत्सव के प्रथम दिन थाईलैंड से आए सुप्रसिद्ध ‘श्री रामाकेन दल’ ने यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल अपनी पारंपरिक ‘खोन नृत्य शैली’ के माध्यम से श्रीराम जन्म, विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, स्वर्ण मृग, सीता हरण और राम-रावण युद्ध के प्रसंगों का विस्मयकारी मंचन किया।
वीर भारत न्यास के सहयोग तथा विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति (उज्जैन) की देखरेख में आयोजित इस उत्सव में रूस के मास्को से आया ‘दिशा रामलीला’ दल रावण वध की प्रस्तुति देगा। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के कलाकार यक्षगान शैली में तथा तेलंगाना के कलाकार चंडू भागवतम् शैली में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत करेंगे।

दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (नई दिल्ली) के सहयोग से प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से शुरू होने वाले इन कार्यक्रमों में विदेशी भाषाओं के संवादों को दर्शकों तक समझाने के लिए विशेष विधिक अनुवादकों की भी मुस्तैद व्यवस्था की गई है।