
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र के स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए एक भव्य एवं प्रेरणादायक अभिविन्यास (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का मुस्तैद आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी. पी. सारस्वत इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम के मुख्य पैट्रन (संरक्षक) रहे, जिनके विधिक मार्गदर्शन में नवागंतुक विद्यार्थियों को विभाग की गौरवशाली परंपराओं तथा मनोविज्ञान के शैक्षणिक व व्यावहारिक महत्व से सघन रूप से परिचित कराया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने दी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की जानकारी
विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस सत्र के दौरान नवागंतुक विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किए गए अत्याधुनिक पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा समझाई गई। उन्होंने वैकल्पिक विषयों, क्षेत्रकार्य, कौशल संवर्धन पाठ्यक्रमों तथा सामान्य मनोविज्ञान प्रयोगशाला की विधिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ धरातल पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम का सफल समन्वय विभागाध्यक्ष के साथ डॉ. ज्योति, शोधार्थियों तथा तृतीय सेमेस्टर के वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा मुस्तैदी से किया गया।
प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने साझा किए अनुभव; प्रो. विजयलक्ष्मी ने समझाया 3H का सिद्धांत
अभिविन्यास कार्यक्रम की मुख्य विशेषता विभाग के पूर्व प्रतिष्ठित शिक्षाविदों व संकाय सदस्यों का प्रबुद्ध व्याख्यान रहा, जिन्होंने विद्यार्थियों को शोध की नई विधिक यात्रा हेतु प्रेरित किया। इसमें प्रोफेसर एस. सी. प्रसाद ने वर्ष 1971 में स्थापित इस विभाग की ऐतिहासिक स्थापना एवं शोध यात्रा की आख्या प्रस्तुत की। प्रोफेसर जानकी मूरजानी ने विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की पुरज़ोर वकालत की। इसी क्रम में, प्रोफेसर विजयलक्ष्मी चौहान ने जीवन में संतुलन हेतु “3H = 3H” की एक विस्मयकारी अवधारणा प्रस्तुत की, जिसके तहत Head (मस्तिष्क), Heart (हृदय) और Hand (हाथ) का संतुलित समन्वय ही जीवन में Health (स्वास्थ्य), Happiness (खुशी) और Harmony (सामंजस्य) सुनिश्चित करता है।
एआई (AI) के नैतिक उपयोग तथा व्यावहारिक मनोविज्ञान पर उमा मित्तल का ज़ोर
सत्र को आगे बढ़ाते हुए प्रोफेसर मणिका मोहन सक्सेना ने विद्यार्थियों को आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सकारात्मक, नैतिक व जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने की विधिक सीख दी, ताकि वे राष्ट्रहित के विरुद्ध भ्रामक गतिविधियों से दूर रहकर एक सच्चे मनोवैज्ञानिक बन सकें। वहीं, प्रोफेसर ए. वी. एस. मदनावत की उपस्थिति के बीच प्रोफेसर उमा मित्तल ने मनोविज्ञान के सिद्धांतों को केवल अकादमिक किताबों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाने की सलाह दी, जिससे व्यक्ति स्वयं की भावनाओं को पहचानकर जीवन को सुव्यवस्थित व संतुलित बना सके। इस संवाद ने नई पीढ़ी के भीतर शोध व अकादमिक अनुशासन के प्रति एक गहरा विधिक विश्वास जगाया है।

