
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं चीनी मिल के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी मुख्य अतिथि एवं राज्य मंत्री विकास एवं चीनी मिल (स्वतंत्र प्रभार) संजय सिंह गंगवार अति विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
मंत्री ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के कड़े परिश्रम और सरकार द्वारा समय पर उपलब्ध कराई जा रही उन्नत तकनीक व कृषि इनपुट की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में गन्ने के उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यद्यपि भाषण और धरातलीय व्यावहारिकता में अंतर होता है, परंतु यह सर्वविदित है कि कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास और सकारात्मक बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री जी के कुशल दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में खाद्य तेलों और दालों के अत्यधिक आयात को कम करने के लिए इनके घरेलू उपभोग और उत्पादन में संतुलन लाना होगा, क्योंकि वर्तमान में भारत इन वस्तुओं का सबसे बड़ा आयातक है।

गन्ना खेती की घटती लाभप्रदता पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने वैज्ञानिकों से विशेष अनुसंधान करने का आग्रह किया कि वैज्ञानिकों द्वारा मात्र 6 महीने में तैयार होने वाली प्रजातियां विकसित की जाएं। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘क्लाइमेट स्मार्ट‘ प्रजातियां तैयार की जाएं। जल संकट को देखते हुए उच्च जल उपयोग दक्षता वाली प्रजातियों का विकास हो। कीटों और गंभीर बीमारियों के प्रति टिकाऊ प्रतिरोधी क्षमता वाली किस्में बनाई जाएं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूजल के दूषित होने और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने नैनो यूरिया जैसी तकनीकों के लिए व्यापक संवेदीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से कंपोस्ट और जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की।
चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि तथा विशेष रूप से गन्ना फसल की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका गन्ना खेती पर आधारित है। पिछले वर्षों में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों की मेहनत के परिणामस्वरूप गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

अपने संबोधन में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98 वर्षों के गौरवशाली योगदान की सराहना करते हुए कहा कि परिषद ने उच्च गुणवत्ता वाली फसल किस्मों के विकास, उत्पादन तकनीकों, फसल संरक्षण तथा कृषि अनुसंधान के माध्यम से देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलते जलवायु परिदृश्य, उत्पादन लागत में वृद्धि, श्रमिकों की उपलब्धता में कमी तथा कीट एवं रोगों की नई चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने गन्ना उत्पादन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विशेष बल दिया।

मंत्री ने कहा कि किसानों तक अधिक उपज एवं रोग प्रतिरोधी गन्ना किस्मों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गन्ने के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों की सहफसली खेती को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो तथा भूमि की उर्वरता भी बनी रहे। गन्ना समितियों के सहयोग से गन्ना खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गन्ना कटाई मशीनों सहित नवीन कृषि यंत्रों के विकास एवं उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैव उर्वरकों एवं जैविक पोषक तत्वों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए। पर्यावरण अनुकूल जैविक कीट नियंत्रण उपायों का विस्तार करते हुए चीनी मिलों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से जैव नियंत्रण एजेंट किसानों को सुलभ एवं किफायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएं।

संस्थान के निदेशक ने अपने स्वागत भाषण में उपस्थित सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए बड़े गर्व के साथ सूचित किया कि भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान अपने गौरवशाली इतिहास के 75 वर्ष पूरे कर चुका है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में गन्ने के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता के आंकड़ों को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता को 115 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना है। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिकों एवं किसानों के सम्मिलित प्रयासों से गन्ना क्षेत्र की सभी चुनौतियों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
एसएन सुशील ने कहा कि उन्नत उत्पादन हेतु अनुसूचित जाति – उप योजना के अन्तर्गत किसानों को एक दिवसीय प्रशिक्षण के साथ ही कृषि सामग्री भी उपलब्ध कराई गयी।

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर डाॅ0 दिनेश, नोडल अधिकारी आर0आर0 वर्मा सहित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक एस0 एन0 सुशील के अतिरिक्त बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थीं। इस अवसर पर किसानों को मंत्री जी द्वारा कृषि सामग्री भी वितरित की गयी।