
डॉ रवि कुमार गुप्ता
अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. रवि कुमार गुप्ता तथा उनके पीएचडी शोधार्थी देशराज दीपक कपूर द्वारा किए गए शोध में गाय के गोबर का उपयोग कर कम लागत वाला जैविक रूप से नष्ट होने वाला बायोप्लास्टिक विकसित किया गया है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने डॉ. रवि कुमार गुप्ता एवं शोधार्थी देशराज दीपक कपूर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनकी इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताया।
डॉ. रवि कुमार गुप्ता के नेतृत्व में हुए इस शोध के दौरान कचरा डंपिंग साइट से एक नए बैक्टीरिया की खोज की गई, जिसकी सहायता से ‘पॉलीहाइड्रॉक्सीब्यूटायरेट’ (PHB) नामक बायोप्लास्टिक तैयार किया गया। यह बायोप्लास्टिक न केवल मजबूत और उपयोगी है, बल्कि मिट्टी में दबाने पर मात्र 50 दिनों के भीतर पूरी तरह जैविक रूप से नष्ट हो जाता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका Bioresource Technology Reports में प्रकाशित हुआ है, जिससे विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक उपलब्धियों को वैश्विक पहचान मिली है।

शोधार्थी देशराज दीपक कपूर
शोधकर्ताओं के अनुसार, पारंपरिक बायोप्लास्टिक निर्माण प्रक्रिया अत्यधिक महंगी होती है, जबकि इस नई तकनीक में कृषि एवं पशु अपशिष्ट, विशेष रूप से गाय के गोबर, को आधार सामग्री के रूप में उपयोग किया गया है। इससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है और यह तकनीक अत्यंत किफायती और स्वदेशी साबित हो सकती है। साथ ही इस शोध की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तीव्र जैव-विघटन क्षमता है। सामान्य प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं, जबकि इस तकनीक से तैयार PHB प्लास्टिक केवल 50 दिनों में मिट्टी में पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
इसके अतिरिक्त, यह शोध ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘सर्कुलर बायोइकोनॉमी’ की अवधारणा को भी मजबूती प्रदान करता है। शहरों के कचरा डंपिंग क्षेत्रों से प्राप्त बैक्टीरिया और ग्रामीण पशु अपशिष्ट के संयोजन से विकसित यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है