उ. प. रे. की अनूठी पहल ‘स्वर से समाधान’; केंद्रीय चिकित्सालय जयपुर में मानसिक स्वास्थ्य पर 50 स्वास्थ्यकर्मियों का महामंथन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तर पश्चिम रेलवे के चिकित्सा विभाग ने मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों को सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से एक अनूठे विशेष अभियान ‘स्वर से समाधान’ (Swar Se Samadhan) की शुरुआत की है। इस वर्ष की वैश्विक थीम “जीने के अनुभवों को सुनें—वास्तविक आवाज़ें, वास्तविक बदलाव” पर आधारित यह अभियान बिना किसी पूर्वाग्रह के संवाद स्थापित करने पर केंद्रित है।

तनाव प्रबंधन संगोष्ठी में गूंजी १० साल के उपचार की दास्तान
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि इस महाअभियान के अंतर्गत केंद्रीय चिकित्सालय, जयपुर में तनाव प्रबंधन पर एक संवादात्मक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें 50 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की। यह दूरदर्शी विधिक पहल राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व अतिरिक्त मुख्य स्वास्थ्य निदेशक डॉ. राम मटोरिया द्वारा प्रारंभ की गई। संगोष्ठी में थीम को चरितार्थ करते हुए राजेंद्र कुमार (परिवर्तित नाम) नामक एक मरीज ने डॉ. राम मटोरिया से पिछले 10 वर्षों से चल रहे अपने सफल मानसिक उपचार और अस्पताल से मिले अभूतपूर्व विधिक सहयोग की प्रेरक दास्तान साझा की। डॉ. मटोरिया और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री प्रीति शर्मा ने प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यस्थल के तनाव और अवसाद को दूर करने के वैज्ञानिक विधिक तरीके समझाए।

संवेदनशील कार्यस्थल समय की विधिक मांग: डॉ. संजय साहा
केंद्रीय चिकित्सालय (जयपुर) के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय साहा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि एक स्वस्थ कार्यस्थल के निर्माण के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर समान ध्यान देना अनिवार्य है। इस गरिमापूर्ण अवसर पर मुख्य स्टाफ सर्जन डॉ. सुबैदा मलफिकन तथा अतिरिक्त मुख्य स्वास्थ्य निदेशक (प्रशासन एवं सामान्य) डॉ. रुचि जैन भी मुस्तैदी से उपस्थित रहीं। अभियान का अंतिम विधिक लक्ष्य चिकित्सा विभाग, प्रभारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय से समाज में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच व कलंक (स्टिग्मा) को जड़ से समाप्त करना है।

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