
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां एवं जन शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास जी की 529 वीं जयंती बड़े धूमधाम से तुलसीदास परिसर कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा पर मुख्य अतिथि श्रीमती मञ्जूषा राजस जौहरी निदेशक तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व चन्द्रशेखर, सुप्रसिद्ध भजन गायक सुधीर व्यास, डॉ अशोक सीमा पाण्डेय समाज शिल्पी दम्पति प्रभारी, राजेन्द्र सिंह वरिष्ठ कार्यकर्ता दीनदयाल शोध संस्थान, केवीके प्रमुख डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी, अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान ने पुष्पार्चन एवं दीपप्रज्वलन से किया।

सर्वप्रथम राजेन्द्र सिंह द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। कृषक प्रेमचंद्र शुक्ल द्वारा तुलसीदास जी के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केवीके प्रमुख ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र जिले में प्रत्येक राजस्व ग्राम में कृषि ज्ञान दूत के माध्यम से ग्रामीण और कृषि विकास में उन्हें एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित करना हैं। ये वैज्ञानिक तकनीकों और आम किसानों के बीच के फासले को मिटाते में सहयोगी होगें। श्रीअन्न एवं दलहन तथा तिलहन, दुग्ध उत्पादन में चित्रकूट को प्रदेश में अग्रणी बनाना है।

प्रख्यात गायक पंडित सुधीर व्यास ने कहा कि गोस्वामी जी द्वारा रचित रामचरित मानस सामाजिक और नैतिक मूल्य, आदर्श संबंध, धर्म की स्थापना समरसता एवं सामाजिक संवेदनशील का ज्ञान कराता है।
चंद्रशेखर – अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने कहा कि पूज्यपाद ने रामचरित मानस के माध्यम से समाज के हर वर्ग के लिए करुणा, प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रदान किया है।
अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान ने कहा कि आप सभी के कौशल, ज्ञान और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का नियोजन किया गया है इसके द्वारा आप सभी नए विचारों को व्यवसाय में बदलना सीखते हैं, जिससे सफल उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलते हैं।

अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती मंजूषा राजस जौहरी निदेशक तुलसी शोध संस्थान ने कहा कि श्रद्धेय नाना जी की कर्म स्थली और तुलसीदास जी की जन्मस्थली की इस पावन धरा को कोटि-कोटि प्रणाम करते हुए आप सबका हृदय से अभिनंदन करती हूं। आज पूज्यपाद तुलसीदास जी की जयंती पर नाना जी की कर्म भूमि पर आकर यहां के प्रमुख समाज मूलक प्रकल्पों का अवलोकन करने के साथ मैं इसके लिए दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन का धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ।
श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16वीं सदी में रचित एक महान और पवित्र महाकाव्य है। जिसमे भगवान राम के आदर्श चरित्र के माध्यम से समाज को धर्म, भक्ति, नैतिकता और मानवता का संदेश दिया है, यह भारतीय संस्कृति और जनमानस की आत्मा है। राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख द्वारा लगाया गया संस्थान रूपी यह बीज आज वट बृक्ष के रूप में समाज को नवीन दिशा प्रदान कर रहा है।

कार्यक्रम का सफल संचालन उत्तम त्रिपाठी प्रसार वैज्ञानिक ने किया तो वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में वैज्ञानिक कमलाशंकर शुक्ला, डॉ अञ्जलि यादव, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ सतीश पाठक, रोहित मिश्र, अंकुर त्रिपाठी, डॉ मनोज शर्मा, आलोक गुप्ता, अभयराज, सुघर सिंह, प्रभाकर मिश्रा, बनारसीलाल पाण्डेय, जन्मेजय सिंह, वरुण त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह, अनुज सिन्हा, समाज शिल्पी दम्पति एवं परमानन्द आश्रम पद्धति विद्यालय के कार्यकर्ताओं ने अपना अमूल्य योगदान प्रदान किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए संचालित परमानन्द आश्रम पद्धति विद्यालय गनीवां के बच्चों द्वारा मनमोहक आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गई। तुलसी कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में एक दिन पूर्व ही रामचरित मानस पाठ का शुभारंभ हुआ जिसकी पूर्णाहुति तुलसी जयंती पर हुई। कार्यक्रम के उपरांत भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमे जिलों के विभिन्न ग्रामों से पधारे प्रमुख गणमान्यजनों सहित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।