शोधार्थी रोशिनी बजाज की नवाचार पहल बनी मिसाल, बीबीएयू में कम्पोस्टिंग एवं वर्मी-कम्पोस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार 16 जून 2026 को पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं नवकल्पना, बीबीएयू के संयुक्त तत्वावधान में ग्रीन हाउस के पीछे स्थित कम्पोस्टिंग एवं वर्मी-कम्पोस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस नवाचार की शुरुआत पर्यावरण विज्ञान विभाग की शोधार्थी सुश्री रोशिनी बजाज द्वारा डॉ. जीवन सिंह एवं प्रो. शिखा के मार्गदर्शन में की गई है। इस अवसर पर प्रो. के.के. पांडेय, प्रो. मनोज जोशी, डॉ. अमोद सिंह एवं प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा उपस्थित रहे। इस कम्पोस्टिंग एवं वर्मी- कम्पोस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन विश्वविद्यालय कुलपति द्वारा फीता काटकर किया गया। इस दौरान शोधार्थी सुश्री रोशिनी बजाज ने वर्मी-कम्पोस्टिंग इकाई में तैयार की गई वर्मी खाद का नमूना कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल को भेंट किया।
  
विश्वविद्यालय कुलपति ने इस परियोजना को व्यावसायिक स्तर तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इसके उत्पादों को बाजार तक पहुँचाया जा सके और इस पहल को सतत उद्यमिता (Sustainable Entrepreneurship) का एक आदर्श मॉडल बनाना है। कुलपति जी ने शोधार्थी रोशिनी बजाज द्वारा स्थापित इस अभिनव स्टार्टअप पहल की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, समर्पण और दृढ़ संकल्प के बल पर ऐसे प्रयासों को सफल बनाया जा सकता है। प्रो. मित्तल ने उपस्थित विद्यार्थियों को नवाचार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि युवाओं में उद्यमशीलता की भावना विकसित करना भी है, ताकि वे रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बन सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि बीबीएयू के विद्यार्थी एवं शोधार्थी इसी प्रकार नवाचार आधारित स्टार्टअप और उद्यम स्थापित करते हैं, तो यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय होगा तथा संस्थान की पहचान नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले अग्रणी विश्वविद्यालय के रूप में और अधिक सशक्त होगी।

इस वर्मी-कम्पोस्टिंग स्टेशन के प्रारम्भिक चरण में 4 सीमेंटेड कम्पोस्टिंग/वर्मी-कम्पोस्टिंग बिन, 1 बाँस आधारित वर्मी-रिएक्टर, 2 उच्च गति वाले रोटरी ड्रम कम्पोस्टर एवं 10 एजीटेटेड पाइल्स/विंडरो की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में लगभग 2000 किलोग्राम पत्तियों का अपशिष्ट परिपक्वता (मैच्युरेशन) प्रक्रिया में है, जिसे तैयार उत्पाद में परिवर्तित किया जा रहा है।लगभग 250 एकड़ में फैले हरे-भरे बीबीएयू परिसर में प्रतिवर्ष लगभग 10,000 किलोग्राम पत्ती अपशिष्ट उत्पन्न होता है। कम्पोस्टिंग एवं वर्मी-कम्पोस्टिंग स्टेशन का लक्ष्य उपलब्ध पत्ती अपशिष्ट का वार्षिक स्तर पर वर्मी-कम्पोस्टिंग कर विश्वविद्यालय को “शून्य अपशिष्ट परिसर” (Zero Waste Campus) के रूप में विकसित करना है।
 
इस अवसर कम्पोस्टिंग एवं वर्मी-कम्पोस्टिंग इकाई की स्थापना समिति द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन एवं सक्षम प्राधिकारी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने इस स्टार्टअप पहल को प्रोत्साहित करने हेतु बायोमास श्रेडर (चाफ कटर), ट्राइसाइकिल ट्रॉली रिक्शा तथा वर्मी-कम्पोस्टिंग बिन/रिएक्टरों के लिए शेड उपलब्ध कराया। साथ ही पर्यावरण विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों ने विश्वविद्यालय नेतृत्व से प्राप्त निरंतर सहयोग एवं समर्थन की सराहना की।

यह स्टार्टअप पहल नवाचार, उद्यमिता, इन्क्यूबेशन एवं सतत विकास का एक उत्कृष्ट संगम है, जो हरित एवं स्वच्छ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर प्रॉक्टर प्रो. राम चंद्रा, पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेंकटेश दत्ता एवं अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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