
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में नेशनल इंटीग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट्स एंड एक्टिविटीज (निफा) उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों से आए 264 समाजसेवियों को उनके निस्वार्थ सामाजिक योगदान के लिए राष्ट्रीय सामाजिक प्रभाव पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया।
समारोह का आयोजन प्रतिष्ठित ‘संवेदना-2 अंतरराष्ट्रीय रक्तदान एवं जनजागरूकता अभियान’ के अंतर्गत रक्तदान शिविरों के आयोजन में सक्रिय योगदान देने वाले समाजसेवियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया।
मुख्य अतिथि के तौर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त मंच पर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री नटवर गोयल, नेशनल इंटीग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट्स एंड एक्टिविटीज (निफा), इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अश्विनी शेट्टी एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अर्पित शैलेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई।
इस अवसर पर बीबीएयू कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि भारत के लगभग 37 करोड़ युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति और अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं के स्वास्थ्य, जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर निर्भर करती है। यदि युवा वर्ग स्वस्थ, शिक्षित और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित होगा, तो विकसित भारत-2047 का सपना साकार करना कठिन नहीं होगा।
प्रो. मित्तल ने कहा कि नियमित रक्तदान केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता की पूर्ति नहीं करता, बल्कि यह मानवता, सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। रक्तदान के माध्यम से अनगिनत लोगों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को समय-समय पर स्वेच्छा से रक्तदान करना चाहिए। उन्होंने समाजसेवियों से आह्वान किया कि वे रक्तदान के साथ-साथ अंगदान के प्रति भी जनजागरूकता बढ़ाएं, ताकि अधिक से अधिक लोगों का जीवन बचाया जा सके।

समारोह का प्रमुख विषय रक्तदान जागरूकता के वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने रक्तदान के क्षेत्र में निफा द्वारा स्थापित विश्व उत्कृष्टता रिकॉर्ड (World Record of Excellence) की सराहना करते हुए सम्मानित समाजसेवियों से इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने का आह्वान किया।
अभियान के अंतर्गत समाजसेवियों से रक्तदान के साथ-साथ अंगदान के प्रति भी जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों का जीवन बचाया जा सके। वक्ताओं ने कहा कि सेवा और दान की संस्कृति को बढ़ावा देकर सामाजिक असमानताओं को कम किया जा सकता है तथा मानवीय मूल्यों को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों से इन मानवीय अभियानों के प्रति निरंतर समर्पित रहने का आह्वान किया गया, ताकि भारत एक विकसित, सशक्त और संवेदनशील राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सके।