बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में ‘सिनेमा, कविता और हाशिये का समाज’ पर व्याख्यान का आयोजन

 सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार 24 फरवरी को अर्थशास्त्र विभाग की ओर से ‘सिनेमा, कविता और हाशिये का समाज’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मुंबई फिल्म जगत के प्रसिद्ध गीतकार डॉ. सागर उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर आईएएस अधिकारी योगेश कुमार, गायक हंसराज, अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सनातन नायक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रणब कुमार आनंद मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि एवं प्रसिद्ध गीतकार डॉ. सागर ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज मुंबई जैसे बड़े शहर में भी छोटे-छोटे स्थानों से आए लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

उन्होंने फिल्म लेखन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला और इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा करते हुए युवाओं को निरंतर अध्ययन, संवेदनशील दृष्टिकोण और समकालीन विषयों की समझ विकसित करने की प्रेरणा दी।

आईएएस अधिकारी योगेश कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपना सर्वोत्तम प्रयास देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधे-अधूरे मन से किया गया प्रयास कभी उत्कृष्ट परिणाम नहीं दे सकता, इसलिए समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम सफलता की कुंजी हैं।

प्रो. सनातन ने अपने वक्तव्य में कहा कि गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे समाज से संवाद स्थापित करने का सशक्त साधन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य और संगीत मिलकर सामाजिक चेतना को जागृत करने तथा सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हंसराज ने अपने मधुर स्वरों में भोजपुरी भाषा के गीत प्रस्तुत किए, जिनमें क्षेत्रीय संस्कृति और लोकभावना की सुंदर झलक दिखाई दी।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्न–उत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी जिज्ञासाएँ और विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने उनके प्रश्नों का संतुलित एवं विस्तृत उत्तर देकर विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टता प्रदान की। अंत में डॉ. प्रणब कुमार आनंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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