बीबीएयू में ‘रूरल साइंस कांग्रेस-2026’ का शुभारंभ…..

अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में सोमवार को “रूरल साइंस कांग्रेस-2026” राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। “सस्टेनेबल रूरल ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू साइंस, टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन प्रबंधन अध्ययन विभाग, बीबीएयू तथा प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अमित कुमार सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए ग्रामीण विकास में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर प्रो. राणा प्रताप सिंह ने सम्मेलन, फाउंडेशन तथा मुख्य वक्ता के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी द्वारा पुरस्कार सत्र का संचालन किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. प्रमोद टंडन ने अपने संबोधन में ग्रामीण विकास के लिए विज्ञान आधारित नवाचारों को समाज तक पहुँचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो. सुनीता मिश्रा ने विश्वविद्यालय की ओर से अपने विचार व्यक्त करते हुए सतत विकास में वैज्ञानिक अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एनबीआरआई, लखनऊ के निदेशक प्रो. अजीत कुमार शासनी ने “पौधों की आंतरिक प्रतिरक्षा क्षमता” विषय पर प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव ओरेशन व्याख्यान दिया, जबकि प्रो. सूर्य कांत ने वायु प्रदूषण से संबंधित ‘वायु मित्र अभियान’ के अनुभव साझा किए। उद्घाटन सत्र के अंत में प्रो. राज शरण शाही ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके उपरांत भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।

दोपहर बाद आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. राम लखन सिंह तथा सह-अध्यक्षता प्रो. उमेश वशिष्ठ ने की। इसके पश्चात आयोजित पुरस्कार व्याख्यान सत्र की अध्यक्षता डॉ. आर. डी. त्रिपाठी ने की। इस सत्र में प्रो. नंदुला रघुराम, प्रो. वेंकटेश दत्ता, डॉ. ममता त्रिपाठी, श्रीमती ज्योति किरण सिन्हा, डॉ. मीनू खरे, डॉ. सैयद जी दस्तागीर तथा डॉ. पूजा शर्मा सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने सतत विकास, जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान संचार और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया। सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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