बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार 9 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 2026 को ध्यान में रखकर ‘गिव टू गेन (Give to Gain) विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष प्रो. आभा मिश्रा एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. धीरेंद्र पाण्डेय उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि जब महिलाओं को शिक्षा और अवसर मिलते हैं, तो पूरा परिवार आगे बढ़ता है और समाज भी मजबूत बनता है। उन्होंने बताया कि ‘नारायण और नारी’ की अवधारणा यह बताती है कि समाज में महिलाओं का सम्मान और मूल्य पुरुषों के समान होना चाहिए ।

कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज भी समाज में जेंडर इक्वालिटी को पूरी तरह स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी कई स्थानों पर महिलाओं को बराबरी के अधिकार और अवसर पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए महिलाओं को समान अवसर और सम्मान मिलना अत्यंत आवश्यक है।

आईसीसी अध्यक्ष प्रो. आभा मिश्रा ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के उद्देश्य और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईसीसी का मुख्य उद्देश्य संस्थान में सुरक्षित, सम्मानजनक और लैंगिक समानता पर आधारित वातावरण को सुनिश्चित करना है।

डॉ. धीरेंद्र पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले साइबर अपराध मुख्य रूप से ओटीपी आदि के माध्यम से किए जाते थे, किंतु वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण अपराध के तरीके भी अधिक जटिल हो गए हैं।

विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा ने अपने वक्तव्य में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े विभिन्न कानूनों की जानकारी देते हुए उपस्थित सभी लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा कविता वाचन और गीत गायन आदि का प्रस्तुतीकरण किया गया। अंत में डॉ. तरूणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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