बीबीएयू में ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के माध्यम से सतत ग्रामीण परिवर्तन’ रूरल साइंस कांग्रेस का उद्घाटन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सोमवार 9 मार्च को ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के माध्यम से सतत ग्रामीण परिवर्तन’ (Sustainable Rural Transformation through Science, Technology and Management) विषय पर आयोजित तीन दिवसीय रूरल साइंस कांग्रेस – 2026 का उद्घाटन हुआ।

यह तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रबंध अध्ययन विभाग, बीबीएयू एवं प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 9- 11 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा द्वारा की गयी। मुख्य अतिथि के तौर पर नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग के पूर्व कुलपति, बायोटेक पार्क, लखनऊ के सीईओ पद्मश्री प्रो. प्रमोद टंडन उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त मंच पर विशिष्ट अतिथि एवं नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय,‌ झारखंड के पूर्व कुलपति प्रो. राम लखन सिंह, केजीएमयू लखनऊ के प्रो. सूर्यकांत, सीएसआईआर- राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. अजीत कुमार शसानी, प्रो.एच.एस. श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रबंध अध्ययन विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह, शिक्षा विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही एवं डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम प्रो. अमित कुमार सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। इसके पश्चात प्रो. राणा प्रताप सिंह ने सभी को कार्यक्रम एवं पी.एच.एस.एस. फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।

विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने सतत ग्रामीण परिवर्तन के संदर्भ में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सरकारी सहयोग की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि प्रो. प्रमोद टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि यहां डिजिटल शिक्षा, राष्ट्र निर्माण तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास का कार्य एक ही छत के नीचे किया जाता है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. राम लखन सिंह ने अपने वक्तव्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता की महत्ता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र के समग्र विकास के लिए इन तीनों क्षेत्रों का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है।

 प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि हमारे फेफड़े प्रतिदिन लगभग 10 हजार लीटर हवा को अंदर-बाहर करते हैं और शरीर को लगभग 500 लीटर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे शरीर की सभी क्रियाएँ संचालित होती हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में वायु प्रदूषण एक ‘इनविज़िबल किलर’ के रूप में सामने आ रहा है, जिसके कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

प्रो. अजीत कुमार शसानी ‘पौधों की आंतरिक प्रतिरक्षा को समझना (Learning Internal Immunity of Plants) विषय पर अपने विचार रखे और पौधों के भीतर पाये जाने वाले विभिन्न जैव सक्रिय यौगिकों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के विधायक रमेश सिंह ने अपने संदेश के माध्यम से आयोजकों को इस प्रकार के सार्थक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम के आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

कार्यक्रम के दौरान मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रो. राणा प्रताप सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेरे भीतर और बाहर एक पृथ्वी’ का विमोचन किया गया। साथ ही पी.एच.एस.एस. फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी द्वारा विभिन्न प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। अंत में प्रो. राजशरण शाही द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए स्पेशल लेक्चर और अवार्ड लेक्चर का आयोजन किया गया। साथ ही भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गयी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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